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Tuesday, May 28, 2024
डेली न्यूज़

प्रशासन की मेहरबानी से आवासीय भवनों का खुलेआम व्यवसायिक उपयोग-

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लग रहा लाखों का चूना

ritesh sahu
नौगांव सहित छतरपुर,हरपालपुर में बैंक स्कूल कोचिंग सेंटर किराए पर चल रहे मोबाइल टावर व नियम विरुद्ध बेसमेंट का निर्माण- सेटेलाइट से सर्वे कराए जाने की मांग
नौगांव सहित छतरपुर, हरपालपुर नगर पालिका क्षेत्र में अधिकांश जगह ऐसी है जो आवासीय है लेकिन नियमों को ताक में रखकर व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है इन पर किसी का अंकुश नहीं है अधिकांश आवास मालिकों ने व्यवसायिक डायवर्शन नहीं कराया है यहां तक कि घरों की छतों पर भी मोबाइल टावर लगाकर और बैंकों को किराए पर देकर हर महीने 30 से ₹40000 हजार रूपये कमा रहे हैं कार्यवाही के अभाव में पूरा नगर अव्यवस्थित हो गया है क्षेत्र की गलियों में अधिकांश आवासीय मकानों में दुकानें संचालित है वही नगर नौगांव हो या छतरपुर ,हरपालपुर जहां देखो वहां भवन निर्माण चल रहा है भूमिगत बहु मंजिला निर्माण कार्य के लिए नगर पालिका से अनुमति सिर्फ आवासीय भवन निर्माण की ली गई है जबकि इस्तेमाल व्यवसायिक हो रहा है उल्लेखनीय है कि नगर सहित छतरपुर,हरपालपुर में बैंक कोचिंग सेंटर स्कूल किराए पर चल रहे हैं जिससे मकान मालिक को हजारों रुपए का फायदा हो रहा है और नगर पालिका मेअावासीय टैक्स जमा नही हो रहा है एक अनुमान के मुताबिक नगर में अधिकांश बैंक स्कूल कोचिंग सेंटर बेसमेंट का निर्माण वह मोबाइल टावरों का अधिकृत रिकॉर्ड नगर पालिका के पास नहीं है वहीं बैंकों द्वारा ना तो पार्किंग की बेहतर व्यवस्था है नाही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम है इसी प्रकार छोटे-छोटे बेसमेंट भी बनाए गए हैं जिनकी संख्या भी 40 से 50 के करीब बताई जा रही है घरों में मोबाइल टावर भी लगे हुए हैं जिससे प्रतिमाएं बैंकों की तरह 30 से 40000 हजार रूपये किराया आ रहा है इनका व्यवसायिक डायवर्शन नहीं हुआ है ऐसे भवन मालिक डायवर्सन शुल्क की चोरी कर रहे हैं तो वही बैंक भी नियमों का पालन नहीं कर रहे नगरीय क्षेत्र के निरंतर विकास के बाद आवासीय मकानों में बदलाव भी होते रहे हैं इसके बाद भी नगर पालिका के राजस्व रिकॉर्ड में अभी तक इनके प्रयोजन नहीं बदले है जिनकी वजह से नजर का स्वरूप भी बिगड़ता जा रहा है तो वही राजस्व की हानि हो रही है जबकि स्थानीय निकायों को आय का स्रोत खुद निकालना होता है इसके बावजूद प्रशासन आय बढ़ाने की वजह वैकल्पिक व्यवस्था के नियम कायदों की अनदेखी कर मूकदर्शक बना हुआ है कई मकान मालिक नगरपालिका कर्मचारियों से सेटिंग कर व्यवसायिक टैक्स नहीं दे रहे हैं मार्केट में बनाए गए बेसमेंट के मालिकों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही मकान भी नक्शों के हिसाब से नहीं बनाए गए हैं पड़ताल करने पर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आती है क्योंकि नगर के समस्त वार्ड के आवासीय मकानों में अधिकांश मकानों में दुकानें संचालित हो रही हैं जानकारों का कहना है कि नगर में व्यवसायिक भवनके लिए एनओसी दी जाती तो परिषद को प्रत्येक भवन को जोड़ कर देखा जाए तो 5 से 10 लाख रुपये राजस्व मिल सकता है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है इसके अलावा नगर में ऐसे भी मैरिज गार्डन है जो नियमों को पूरी तरह पालन नहीं कर रहे तो वही आवास मालिक टावर लगाने के नियमों का पालन नहीं कर रहे जिसका नतीजा है कि नगर नौगांव हो या फिर छतरपुर हरपालपुर आवासीय कम और व्यवसायिक ज्यादा नजर आने लगा है खुलेआम टैक्स की चोरी हो रही है ना जनता खुद आगे आ रही है और ना ही नगर पालिका प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रही है जिससे राजस्व का प्रतिमाह लाखों का घाटा हो रहा है लोगों का कहना है कि नगरपालिका है बरसों से पदस्थ कर्मचारियों का स्थानतरण नहीं होता है तब तक राजस्व की चोरी होती रहेगी हालांकि आयकर विभाग ने किराए पर मोटी धनराशि का खर्च दिखाकर टैक्स में छूट पाने वालों पर शिकंजा कस दिया है जो भी अब अन्य मद में किराया दिया जाना दिखाते है उनको ओनर का पैन कार्ड नंबर भी देना होगा लोगों का कहना है कि सेटेलाइट के जरिए सर्वे कराया जाए तो बहुत ही साफ तस्वीर सामने आ जाएगी कि किन किन वार्डों के आवासों में दुकान संचालित हो रही है या फिर नगर पालिका की सर्वे की जगह प्राइवेट सर्वे कराया जाए तो भी हकीकत सामने आ जाएगी

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