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Tuesday, December 6, 2022
डेली न्यूज़

बीते दो दशक से यातायात पुलिस की तैनाती को तरसती जनता प्रशासन मौन (अवैध वसूली बनी सबसे बड़ा रोड़ा)

Visfot News

रितेश साहू (अजीत)

अवैध वसूली की कट्टरता का परचम लहरा रहे पुलिसकर्मी जन चर्चा का विषय बने
दरअसल यातायात पुलिस ही बेहतर तरीके से व्यवस्थाएं सभालती की है क्योंकि इनको यातायात व नियमों की ट्रेनिंग दी जाती है और वह यातायात नियमों का बेहतर ढंग से पालन कराने में समक्ष होते हैं लेकिन कमाल की बात तो यह है कि बीते दो दशकों से नगर की यातायात व्यवस्था जिन हाथों में है उनको यातायात नियमों की एबीसीडी तक पता नहीं यकीन ना हो तो तैनात कर्मियों से यातायात संकेतों को लेकर सवाल किए जाए तो स्वता: ही हकीकत सामने आ जाएगी इतना जरूर है कि यह अवैध वसूली को लेकर पूरी तरह समक्ष है चाहे अवैध कारोबारी हो या आर्थिक अपराधों के माफिया या फिर रेत माफिया और लोडिंग ट्रक गजब का अनुभव देखा जा सकता है अधिकारियों को गुमराह करने में भी निपुण हैं

( “अगर जनता व मीडिया अपने पर आ गई तो नेतागिरी और भ्रष्टाचार शैली सब धरी की धरी रह जाएगी )
(पूछती है जनता)
आखिर थक चुकी जनता क्षेत्र के नेताओं व जिले में बैठे अधिकारियों से पूछती है कि ऐसा क्या हो गया कि बीते दो दशकों से नगर में यातायात पुलिस की तैनाती नहीं की जा रही हालातों को समझे हर चीज की अति अच्छी नहीं होती
मुद्दे वहां भी है जहां से खबरे नहीं आती दुनिया वहां भी है जहां से कैमरे नहीं पहुंचते आवाज वहां से भी आती है जहां की चीखें दवा दी जाती हैं और जब विरोध करने के बावजूद क्षेत्रीय नेता और मीडिया अनदेखी करने लगे तो फिर जनता को लूटना भी देश हित में लगने लगता है ऐसे लोगों के हौसले इतने बुलंद हो जाते हैं कि नेताओं और मीडिया की चापलूसी का कोई लेवल नहीं रह जाता जिसका प्रमाण है कि नौगांव नगर चरमराती यातायात व्यवस्था जिससे नगर के साथ-साथ वाहन चालक त्रस्त है और यातायत व्यवस्था को संभालने बाले पुलिसकर्मी मस्त है मस्ती का आलम यह है कि अवैध वसूली से लेकर चर्चित पुलिसकर्मी फेसबुक और अखबारों में जन्मदिन मनाने में डूबी रहती है हास्य पद बात यह है कि जनहित के नाम पर सेवा करने वाली शुभकामनाएं देकर मानो यह कह रहे हो कि दिनों दिन यूं ही फलते फूलते रहे भले ही जनता परेशान हो हम गुणगान करते रहेंगे जिसको लेकर कई बार जनता ने मांग भी की नगर में यातायत विभाग की स्थायी स्थापना के साथ यातायत पुलिस की तैनाती की जाए लेकिन बीते दो दशकों के दौरान आज तक इस गंभीर मुद्दे पर किसी ने गौर नहीं किया इस दौरान जनसंख्या के साथ-साथ वाहनों की संख्या में जितनी तेजी से बढ़ी उतनी ही तेजी से सिकुडति सड़कों के साथ यातायत व्यवस्थाएं चरमराती गई लेकिन आज तक यातायात पुलिस की तैनाती नहीं की गई आजादी के बाद यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और कानूनों का पालन ना करने वालों के लिए बनाए गए कानूनों को 60 वर्ष से अधिक का समय हो गया है और इस दौरान कई सरकारें आई और गई साथ ही समय-समय पर नए कानून भी बनाए गए तकि यातयात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके क्या वाकई में मैं आज यातायात कानून का सही उपयोग रहा है फिलहाल हम शांति का टापू कहे जाने वाला नगर नौगांव में यातायत कानून का सही उपयोग हो रहा है शायद नहीं बल्कि कानून जिस उद्देश्य के मद्देनजर लागू हुए वे इससे कोसों दूर नजर आ रहे हैं मिस यूज़ हो रहा है हालात यह है कि बिना ट्रेनिंग प्राप्त खाकी वर्दी के लिए ये अबैध कमाई का हथियार बनता जा रहा है नगर की बदहाल यातायात व्यवस्था से बड़ा कोई सबूत नहीं है थाने में तैनात तथाकथित पुलिसकर्मी उच्च अधिकारियों को गुमराह कर देते हैं कि यहां यातायात पुलिस की जरूरत नहीं है जबकि यहां यातायत पुलिस की सख्त जरूरत है कई बार लोगों ने मांग भी की लेकिन सिस्टम इतना तगड़ा बना रखा है कि ना तो विभागीय उच्च अधिकारी क्षेत्रीय नेता खामोश मीडिया की क्या मजाल समस्या को उजागर कर जनता को राहत मिले हालत यह है कि बीते बरसों के दौरान जहां सड़कें सिकुडति जा रही हैं वही आए दिन चरमराती यातायत व्यवस्था की ऐसी तस्वीरें सामने आ रही है कि लोग हैरान हो जाते हैं इतना ही नहीं बिना ट्रेनिंग प्राप्त पुलिस कर्मियों के लिए यह एक कमाई का हथियार बनता जा रहा है जिसका नतीजा है कि भीड़ वाले चौराहों की जगह पुलिस सुनसान वाले इलाकों में नजर आती है बस स्टैंड की हालत तो और भी बदतर है जहां आए दिन जाम जैसे हालात और क्षमता से अधिक सबारिया वाहनों में देखी जा सकती है इतना ही नहीं नगर में युवा पीढ़ी खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं बिना हेलमेट तीन तीन लोगों को दो पहिया वाहनों पर और चार पहिया वाहन चालक बिना सीट बेल्ट बांधे बे खौफ वाहन चला रहे हैं मनमर्जी से कहीं भी वाहन पार्क कर देते हैं जिससे सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है कई बार तो लोगों की मौत भी हो जाती है और यह सब यातायत नियमों का पालन ना करने से होता है वही चालान के नाम पर खानापूर्ति ही कर चंद लोगों परलगे कर कर्मी स्वहित साधने में लगे है जबकि ट्रैफिक पुलिस चाहे तो इसे नियंत्रित कर सकती है ऐसा भी नहीं है कि लोगों की गलती ना हो मगर यह यातायात नियमों का पालन करे तो अपने साथ दूसरों की सुरक्षा कर सकेंगे लेकिन कभी भी सख्त कार्यबाही खौफ नहीं की गई और होती भी है तो मामला रफा दफा कर दिए जाते है या तो व्यवस्था के लिए समय-समय पर अभियान चलाई जाते है उसके बावजूद दुर्घटनाएं हो रही हैं नगर की यातायत व्यवस्था पर गौर किया जाए तो नगर के सबसे व्यस्त चौराहे जैसे कोठी चौराहा ईसानगर चौराहा टीवी अस्पताल चौराहा सहित बस स्टैंड की हालत बदतर है लेकिन इन इलाकों में पुलिस नजर नहीं आती हां पुलिस आए दिन उन इलाकों में नजर आ जाती है जहां नजर नहीं आना चाहिए हैरत की बात है कि यातायत पुलिस की स्थापना के इतने बरसों बाद भी नगर में ट्रेनिंग प्राप्त यातायत पुलिस का तैनात नहीं की जा रहा है जा रहा है और जो तैनात है उन्हें ट्रेनिंग नियमों की एबीसीडी का भी ज्ञान नहीं है ऐसे में उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है स्थिति इतनी भयहव है कि वाहन मालिक ड्राइवर से कहता है कमा कर लाओ और पुलिस कहती है कि कमाकर हमको दो यह हम नहीं बल्कि वाहन चालकों का कहना है लोगों से इस संबंध में बात की तो सभी ने अपनी-अपनी मिली-जुली प्रतिक्रिया में एक ही बात कही कि कई बार मांग करने के बावजूद यातायात पुलिस की तैनाती ना होना जिले में बैठे अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठती है इसके बावजूद यातायत पुलिस की तैनाती ना होने से यहां यातायात के नाम पर भ्रष्टाचार का परचम लहराया जा रहा है और पुलिस की इस विकास यात्रा से मानो स्थानीय नागरिक व जनहित की सेवकों को सहने की शक्ति मिल गई हो यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं “जब एक थी नौगांव पुलिस होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा”

ritish ritishsahu
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