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Tuesday, December 6, 2022
खास समाचारमध्यप्रदेश

महिलाएं आज भी गांव के बाहर उतारती हैं चप्पलें जानिए कहां

Visfot News

वर्षों पुरानी परंपरा आज भी है कायम
बक्सवाहा। छतरपुर जिला मुख्यालय से 135 किलोमीटर दूर बकस्वाहा ब्लॉक की एक पंचायत ग्राम मानकी है। यह गांव जैन समुदाय के तीर्थ स्थलीय नैनागिरी के समीप छोटी सी टेकरी नुमा पहाड़ी पर बसा है। गांव में करीब 200 वर्ष से निवासरत सभी परिवार आदिवासी समुदाय सौंर के हैं जिनमें वर्षों पुरानी परम्परा आज भी कायम है।गांव की देशरानी आदिवासी ने बताया कि गांव की महिलाओं को गांव के अंदर चप्पल पहनने की अनुमति नहीं है जबकि यह नियम गांव की बेटियों पर लागू नहीं होता। इसके अलावा अजनबी व्यक्ति के सामने भी चप्पर उतारकर सिर पर सिर के पास रखने का रिवाज है। जब यह मामला जनचर्चा का विषय बना तो पड़ोसी गांव के पुजारी भगवानदास ने कहा यह अपने से बड़ों का सम्मान है इसमें कुछ भी गलत नहीं है जबकि स्वयंसेवी राजेश यादव ने भगवान श्रीकृष्ण की कहानी सुनाकर इस प्रथा को गलत बताया है। स्वयंसेवी की समझाइश के बाद ने इस कुप्रथा को बदलने पर विचार करने की बात कही है। अच्छी बात यह है कि जो पुजारी पहले इस प्रथा को सही बता रहे थे बाद वे इसमें बदलाव की बात पर राजी हो गए और उन्होंने कहा कि वे गांव में बैठक कर लोगों को समझाइश देंगे। आपको बता दें कि स्वयंसेवी राजेश यादव, महिला शक्ति समूह, ग्राम पंचायत समन्वय समिति के साथ ग्राम सभाओं के माध्यम से ऐसी कुप्रथाओं का शिकार महिलाओं के विकास की योजना से जोडक़र मुख्यधारा में लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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