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Saturday, April 20, 2024
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पेट्रोल-डीजल एलपीजी और महंगी होगी गैस पर खत्म हुई सब्सिडी

पेट्रोल-डीजल एलपीजी और महंगी होगी गैस पर खत्म हुई सब्सिडी

पेट्रोल-डीजल एलपीजी और महंगी होगी गैस पर खत्म हुई सब्सिडीपेट्रोल-डीजल एलपीजी और महंगी होगी गैस पर खत्म हुई सब्सिडी
Visfot News

नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ी कीमतों से आगे भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। यह आम आदमी पर बोझ बढ़ाने का काम करेगा। आईआईएफएल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसीडेंट (करेंसी व एनर्जी रिसर्च) अनुज गुप्ता ने बताया कि अमेरिका में प्राकृतिक गैस 12 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इसकी वजह यह है कि वैश्विक बाजार में ईंधन की आपूर्ति में कमी ने सर्दियों से पहले देश में आशंकाओं को जन्म दिया। इससे गैस की मांग में बड़ा उछाल आया है, जो कीमत बढ़ाने का काम किया है। वहीं, तेल निर्यात देशों के संगठन ओपेक ने भी कच्चे तेल का उत्पादन मांग के अनुरूप धीरे-धीरे बढ़ाने का फैसला किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तरल पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी की कीमत तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर हुआ है और आगे भी होगा। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेजी के मद्देनजर बुधवार को रसोई गैस एलपीजी की कीमत में 15 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई, जबकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।

पिछले एक साल में रसोई गैस 305.50 रुपये तक महंगा हो चुका है। इस वर्ष 1 सितंबर को 14.2 किलोग्राम के गैर-सब्सिडी रसोई गेस सिलेंडर के दाम में 25 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले 17 अगस्त को गैस सिलेंडर की कीमतों में 25 रुपये का इजाफा हुआ था। इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मौजूदा समय में प्रति सिलेंडर 100 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मई में सऊदी अरब 483 डॉलर प्रति मैट्रिक टन की दर से एलपीजी की आपूर्ति करता था। वहीं, अक्टूबर आते सऊदी अरब ने 797 डॉलर प्रति मैट्रिक टन कर दिया है जिससे कंपनियों को करीब 100 रुपये प्रति सिलेंडर का नुकसान हो रहा है। ओपेक प्लस (तेल उत्पादक देशों) द्वारा उत्पादन में वृद्धि को प्रति दिन चार लाख बैरल पर सीमित करने से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 82.92 डॉलर प्रति बैरल हो गई है जिसकी वजह से ईंधन की कीमतों में बड़े अनुपात में वृद्धि की जा रही है। यह सात साल का उच्चतम स्तर है। सूत्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में सुधार की उम्मीद में तेल कंपनियों ने बढ़ोतरी को मामूली स्तर तक रखा था। एक सूत्र ने कहा, तेल विपणन कंपनियों ने अभी तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में मामूली वृद्धि की है। हालांकि, कीमत में सुधार नहीं होने की स्थिति में, काफी मूल्य वृद्धि की जा सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने बताया कि आगे भी पेट्रोल-डीजल और रसोई गैसे की कीमत में कमी की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि कोरोना टीकाकरण की रफ्तार तेज होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से खुल रही है। इससे ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी है। उस अनुपात में उत्पादन नहीं हो रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत में और तेजी देखने को मिल सकती है। इसका असर भारतीय बाजार पर पड़ना तया है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में सस्ते ईंधन की उम्मीद नहीं करना ही बेहतर होगा।

RAM KUMAR KUSHWAHA

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