Please assign a menu to the primary menu location under menu

Saturday, November 26, 2022
धर्म कर्म

20 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, बैंड, बाजा, बरात ,पर लगेगा विराम, नहीं बजेगी शहनाई

Visfot News

भोपाल। विवाह के ज्यादातर मुहूर्त कोरोना की चपेट में आ गए। अब एक बार फिर से बैंड, बाजा ,बारात पर ब्रेक लगने जा रहा है। 20 जुलाई को चातुर्मास शुरू होते ही सभी तरह के मांगलिक कार्य 4 महीने के लिए बंद हो जाएंगे।चातुर्मास को देवताओं का शयन काल माना जाता है। इस दौरान भगवान श्री हरि योग निद्रा में विश्राम करते हैं।उनकी अनुपस्थिति में शुभ कार्य नहीं होते। अब 18 जुलाई के बाद नवंबर में ही शादियां होंगी। पहला मुहूर्त 20 नवंबर को होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी के अनुसार साल की शुरुआत में ही गुरु, शुक्र ,अस्त होने की वजह से शादियों के लिए कम मुहूर्त थे। मार्च में कुछ शादियां हुई ,और 9 अप्रैल से दोबारा लॉक डाउन लग गया। जून में बंदिशों से राहत मिली। तो अब आगे चतुर्मास सामने है। इस तरह 2021 के ज्यादातर मुहूर्त ग्रह गोचर की स्थिति और कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गए। चतुर्मास के बाद नवंबर में चार और दिसंबर में 13 मुहूर्त ही शादी के बचेगे, जनवरी-फरवरी में क्रमश: शुक्र और गुरु अस्त हो जाएंगे। इसकी वजह से साल 2022 के शुरुआती महीने में केवल 6 मुहूर्त ही शादी के मिलेंगे। चतुर्मास में शादी के अलावा जनेऊ, मुंडन, संस्कार, गृह प्रवेश, नए कार्य की शुरुआत समेत सभी शुभ कार्य प्रतिबंधित हो जाएंगे। लेकिन खरीदारी बिक्री पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। 11 जुलाई ,को रवि पुष्य योग पड़ रहा है।जिसे खरीदारी के लिए श्रेष्ठ माना गया है। 25 जुलाई ,से सावन मास शुरू होगा। आगे नवरात्रि , दीपावली जैसे कई महत्वपूर्ण त्यौहार भी होंगे।
कौन है योग निद्रा माया
ब्रह्मावैवर्त पुराण के अनुसार एक बार योग निद्रा ने बड़ी कठिन तपस्या कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया। और उनसे प्रार्थना की कि भगवान आप मुझे अपने अंगों में स्थान दें। लेकिन श्री हरि ने देखा। कि उनका अपना शरीर तो लक्ष्मी के द्वारा अधिकृत है। इस तरह का विचार कर विष्णु ने अपने नेत्रों में योग निद्रा को स्थान दे दिया। और योगनिद्रा को आश्वासन देते हुए कहा।कि तुम वर्ष मै 4 माह के लिये मेरे नेत्रों में आश्रित रहोगी।
चतुर्मास में क्या करें।
देवताओं के पूजन ,मंत्र ,सिद्धि, और मनोवांछित कामना की पूर्ति के लिए अद्वितीय अवसर चतुर्मास को माना गया है। इस दौरान अर्गला स्त्रोत का पाठ करने से विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। रोग मुक्ति के लिए सावन मास में रुद्राभिषेक करने से रोग दूर होते हैं। गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से धन की बढ़ोतरी होती है।

RAM KUMAR KUSHWAHA
भाषा चुने »