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Saturday, April 20, 2024
खास समाचारमध्यप्रदेश

1 दिन का कोयला बचा, नहीं हुआ कोयले का इंतजाम तो अंधेरे में कटेगी रात

1 दिन का कोयला बचा, नहीं हुआ कोयले का इंतजाम तो अंधेरे में कटेगी रात

1 दिन का कोयला बचा, नहीं हुआ कोयले का इंतजाम तो अंधेरे में कटेगी रात1 दिन का कोयला बचा, नहीं हुआ कोयले का इंतजाम तो अंधेरे में कटेगी रात
Visfot News

मप्र और दिल्ली में बिजली संकट की आहट, मप्र बिजली की डिमांड 10 हजार मेगावाट और उत्पादन 3900 मेगावाट, केजरीवाल की मोदी को चिट्ठी तो टाटा पावर ने कहा-बिजली संभलकर इस्तेमाल करें, दिल्ली के ऊर्जा मंत्री बोले-1 दिन का कोयला बचा, खरगोन में कोयला पूरी तरह समाप्त, गाडरवाड़ा में महज एक दिन का कोयला तो सबसे बड़े पावर प्लांट सिंगाजी में सिर्फ दो दिन का कोयला बचा
नई दिल्ली/भोपाल। देश की राजधानी दिल्ली और मप्र में बिजली संकट की आहट शुरू हो गई है। दिल्ली के उत्तरी हिस्से में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी टाटा पावर ने लोगों को मैसेज भेजकर सतर्क रहने और बिजली का संभलकर इस्तेमाल करने के लिए कहा है। मैसेज में कहा गया है कि राजधानी में दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक सप्लाई पर असर पड़ सकता है। अगर जल्द ही कोयला सप्लाई नहीं की गई तो 2 दिन बाद बड़े स्तर पर कटौती शुरू हो सकती है। वहीं पावर प्लांटों में कोयले के देशव्यापी संकट का असर मप्र में भी दिखने लगा है। प्रदेश में महज 592 हजार टन कोयला बचा है। खरगोन में कोयला पूरी तरह समाप्त हो चुका है। गाडरवाड़ा में भी महज एक दिन का कोयला बचा है। इससे प्रदेश में बिजली संकट पैदा होगा। इसके बावजूद, ऊर्जा मंत्री का दावा है कि प्रदेश में बिजली संकट नहीं होने दिया जाएगा। मध्यप्रदेश जनरेशन कंपनी के सबसे बड़े श्री सिंगाजी थर्मल पावर में दो दिन का कोयला बचा है। प्रदेश में बिजली की डिमांड 10 हजार मेगावॉट तक पहुंच रही है। इसकी तुलना में प्रदेश में थर्मल, जल, सोलर व विंड से महज 3900 मेगावॉट ही बिजली का उत्पादन हो पा रहा है। शेष बिजली सेंट्रल पावर से ली जा रही है।
मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी के मुताबिक कंपनी के थर्मल प्लांट को रोज 52 हजार टन कोयले की जरूरत पड़ती है। वहीं, निजी थर्मल पावर के लिए 25 हजार टन और सेंट्रल थर्मल पावर प्लांट के लिए 111 हजार टन कोयले की जरूरत रोज पड़ती है। इसकी तुलना में 7 अक्टूबर की स्थिति में प्रदेश में कुल 592 हजार टन कोयला है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के एमडी मनजीत सिंह के मुताबिक मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृहों में कोयले की उपलब्धता के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। सभी स्त्रोतों से कोयला लेने की कोशिश हो रही है। कोल इंडिया व रेलवे से कोयले की सप्लाई के लिए बात की जा रही है। हमारी स्थिति सामान्य नहीं है, लेकिन अन्य प्रदेशों की तुलना में हम बेहतर हैं। राजस्थान, कर्नाटक व पंजाब में कोयले की कमी से पावर कट लागू कर दिए गए हैं। कोयले की उपलब्धता के लिए ऐसे अभूतपूर्व प्रयास कर रहे हैं, जो इसके पूर्व कभी नहीं किए गए।
22 हजार मेगावॉट बिजली का अनुबंध
मप्र सरकार ने कुल 22 हजार मेगावॉट बिजली का अनुबंध कर रखा है। इसमें सेंट्रल से मिलने वाली 8300 मेगावॉट बिजली भी शामिल है। थर्मल पावर के तौर पर 6700 मेगावॉट, जल विद्युत के तौर पर 3066 मेगावॉट, विंड से 2416 मेगावॉट, सोलर से 1560 मेगावाट और अन्य स्रोत से 01 मेगावॉट बिजली मिल सकती है। विंड व सोलर की बिजली मौसम पर निर्भर है। डैम का प्रयोग पेयजल और सिंचाई के लिए अधिक उपयोग किया जाता है। बिजली कम बनती है। अधिक डिमांड बढऩे पर ही जल संयंत्रों को चलाते हैं।
मुश्किल से 3900 मेगावॉट बिजली सप्लाई हो पा रही
प्रदेश में अभी 10 हजार मेगावॉट के लगभग बिजली की डिमांड पहुंच रही है। 08 अक्टूबर को प्रदेश में बिजली की डिमांड 9976 मेगावॉट पहुंची थी। इसमें 3970 मेगावॉट की सप्लाई ही एमपी के पावर प्लांटों और जल विद्युत संयंत्रों से हो पाया। शेष बिजली सेंट्रल सेक्टर से लेनी पड़ी।
कोयला की कमी से बिजली संकट का खतरा
ऊर्जा विभाग सूत्रों का कहना है कि केवल मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स में कोयले की किल्लत हो गई है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह कह चुके हैं कि कुछ ही दिन का ही कोयला बचा है। भारत अपनी जरूरत की 70 प्रतिशत बिजली कोयला जलाकर ही पैदा करता है। इस बयान के साफ संकेत हैं कि कोयले की कमी से आने वाले दिनों में बिजली का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। वहीं, प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि कोल इंडिया को बकाया पैसों के भुगतान की व्यवस्था कर ली गई है। प्रदेश में बिजली की कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन नवरात्रि के दौरान इसकी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस ने साधा निशाना
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि प्रदेश में कोयले का भारी संकट बना हुआ है, जिससे बिजली का उत्पादन लगातार घट रहा है। बिजली संयंत्रों की कई इकाइयां बंद हो चुकी हैं। प्रदेश गहरे बिजली संकट की और बढ़ रहा है। उन्होंने सोशल पोस्ट कर कहा है कि लोग परेशान हैं और सरकार चुनाव में व्यस्त है।

दिल्ली में बड़े स्तर पर कटौती की तैयारी
दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी टाटा पावर ने कहा है कि अगर जल्द ही कोयला सप्लाई नहीं की गई तो 2 दिन बाद बड़े स्तर पर कटौती शुरू हो सकती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी बिजली संकट को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस मसले पर ध्यान देने की अपील की। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि पूरे देश में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट में कोयले की बहुत कमी है। दिल्ली को जिन प्लांट से बिजली आती है, उनमें 1 दिन का स्टॉक बचा है। कोयला बिल्कुल नहीं है। केंद्र सरकार से अपील है रेलवे वैगन का इस्तेमाल कर कोयला जल्द पहुंचाया जाए।
देशभर में स्थिति गंभीर
देश में लगभग 70 प्रतिशत बिजली कोयले से बनती है। बिजली उत्पादन के लिए पावर प्लांट्स के पास कोयले का स्टॉक काफी कम रह गया है। देश में कोयले से 135 पावर प्लांट हैं। इनमें अभी 2 से 4 दिन का स्टॉक है। देश की लगभग तीन चौथाई कोयले की जरूरत घरेलू खानों से पूरी होती है, लेकिन भारी बारिश के चलते उनमें और ट्रांसपोर्ट रूट पर पानी भर गया है। ऐसे में कोयले से पावर प्लांट्स चलाने वाली कंपनियों के सामने दुविधा यह है कि नीलामी में जो भी कोयला मिले, उसके लिए ज्यादा प्रीमियम दें या विदेशी बाजार से मंगाएं, जहां पहले से कीमत रिकॉर्ड हाई लेवल पर है। एल्यूमीनियम प्रॉडक्शन कंपनियों की शिकायत है कि कोल इंडिया ने पावर प्लांट्स को कोयला देने के लिए उनकी सप्लाई घटा दी है। कोयला सचिव अनिल कुमार जैन ने कहा कि बारिश के चलते खानों में पानी भर जाने से पावर प्लांट्स को रोज 60 से 80 हजार टन कम कोयला मिल रहा है।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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