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Tuesday, December 6, 2022
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जागरुकता शिविर का हुआ आयोजन

Visfot News

छतरपुर। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार एवं अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश अरुण कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में शनिवार को विश्व बाल श्रम प्रतिषेध दिवस के अवसर पर ऑनलाइन माध्यम से मोतीलाल विधि महाविद्यालय, छतरपुर के छात्रों से जुडक़र मध्यस्थता जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। एडवोकट वशिष्ठ नारायण श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि मुख्य वक्ता के रूप में प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय कपिल मेहता ,एडीजे नोरिन निगम विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एडीजे प्रशांत निगम उपस्थित रहे। प्रधान न्यायाधीश कपिल मेहता ने छात्रों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए बताया कि बाल श्रम का मतलब यह है कि जिसमें कार्य करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित आयु सीमा से छोटा होता है। इस प्रथा को कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने शोषित करने वाली प्रथा माना है। बाल श्रम अभी भी कुछ देशों में आम है। कभी-कभी उन्हें दुकान और रेस्तरां (जहाँ वे वेटर के रूप में भी काम करते हैं) के काम में लगा दिया जाता है। यदि निश्चित उम्र से कम में कोई बच्चा घर के काम या स्कूल के काम को छोडक़र कोई अन्य काम करता है। किसी भी नियोक्ता को एक निश्चित आयु से कम के बच्चे को किराए पर रखने की अनुमति नहीं है। किसी प्रतिष्ठान में बिना माता पिता की सहमति के न्यूनतम उम्र 16 वर्ष निर्धारित है। यद्यपि इस देश के कानून के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे काम नहीं कर सकते, फिऱ भी कानून को नजरअंदाज कर दिया है। यदि आपने इस क़ानून का उल्लंघन होते हुए देखें तो आप इसकी शिकायत पुलिस या मजिस्ट्रेट से कर सकते है। आप बच्चों के अधिकारों पर काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं की नजऱ में भी यह ला सकते हैं जो मुद्दे को आगे तक ले जा सकते हैं। एडीजे नोरीन निगम ने बताया कि बाल श्रम का अपराध संज्ञेय अपराधों की श्रेणी में आता है। अर्थात इस कानून का उल्लंघन करते हुए पकड़े जाने पर वारंट की गैर-मौजूदगी में भी गिरफ़्तारी या जाँच की जा सकती है। कोई भी व्यक्ति जो 14 साल से कम उम्र के बच्चे से काम करवाता है अथवा 14-18 वर्ष के बच्चे को किसी खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में काम देता है, उसे 6 महीने से 2 साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है और साथ ही 20 से 50 हजार रूपए तक का जुर्माना भी हो सकता है। रजिस्टर न रखना, काम करवाने की समय-सीमा न तय करना और स्वास्थ्य व सुरक्षा सम्बन्धी अन्य उल्लंघनों के लिए भी इस कानून के तहत 1 महीने तक की जेल और साथ ही 10,000 रूपए तक का जुर्माना भरने की सज़ा हो सकती है। उक्त शिविर में लगभग 60 विधि छात्रों ने ऑनलाइन माध्यम से जुडक़र सहभागिता की।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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