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Friday, December 2, 2022
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रक्षाबंधन पर इस बार सूर्योदय के पहले ही समाप्त हो जाएगी भद्रा

रक्षाबंधन पर इस बार सूर्योदय के पहले ही समाप्त हो जाएगी भद्रारक्षाबंधन पर इस बार सूर्योदय के पहले ही समाप्त हो जाएगी भद्रा
Visfot News

राखी बांधने के लिए पूरा दिन श्रेष्ठ, शुभ योगों का भी रहेगा संयोग
भोपाल। आमतौर पर रक्षाबंधन के दिन भद्रा की स्थिति बनती है, इसलिए राखी बांधने के लिए भद्रा समाप्ति का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर्व में भद्रा आड़े नहीं आएगी। रक्षाबंधन पर सूर्योदय के पहले ही भद्रा की समाप्ति हो जाएगी, इसलिए पूरा दिन राखी बांधने के लिए श्रेष्ठ रहेगा। इसी के साथ इस दिन ग्रह नक्षत्रों के मेल से कई शुभ संयोग भी विद्यमान रहेंगे।
रक्षाबंधन 22 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन बहने अपने भाइयों को राखी बांधेगी और रक्षा का वचन लेगी। शहर में रक्षाबंधन की तैयारियां शुरू हो गई है। पूर्णिमा होने के कारण अक्सर रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहता है। कई बार सुबह से दोपहर बाद तक भद्रा की स्थिति रहती है, भद्रा की समाप्ति के बाद ही राखी बांधी जाती है। इस बार भद्रा 22 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त में 5 बजकर 19 मिनट पर ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए सूर्योदय से लेकर पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा।
दो शुभ योग
ज्योतिष मठ संस्थान के पं. विनोद गौतम के अनुसार रक्षाबंधन के दिन दो शुभ योग विद्यमान रहेंगे। सुबह से शाम तक मातंग योग रहेगा और दोपहर 12 बजे तक शोभन योग का संयोग भी रहेगा।
पूरा दिन शुभ
ब्रह्म ज्योतिष संस्थान के पं. जगदीश शर्मा ने बताया कि भद्रा इस दिन सूर्योदय के पहले ही खत्म हो जाएगी, इसलिए पूरा दिन ही राखी बांधने के लिए श्रेष्ठ है। इस दिन शोभन योग भी रहेगा। इसी प्रकार धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। पं. शर्मा के अनुसार वैसे तो राखी बांधने के लिए पूरा दिन शुभ है लेकिन शाम 4:30 से 6 बजे तक राहुकाल है। इसलिए राहु काल में रक्षा सूत्र बांधने से बचें।
सजने लगे राखी के बाजार
हर साल रक्षाबंधन के एक माह पहले ही बाजारों में राखियों की दुकाने सज जाती थी, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण देर से दुकाने सज रही है। बाजारों में राखियों के स्टॉल लगने लगे हैं, लेकिन फिलहाल खरीदारी कमजोर है, लेकिन व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ग्राहकी जोर पकड़ेगी। पुराने शहर के थोक दुकानों से राखी की बिक्री धीरे-धीरे शुरू हो गई है, वहीं नए शहर के बाजारों में भी धीरे-धीरे दुकानदार स्टाल लगाने लगे हैं।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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