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Saturday, November 26, 2022
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आरटीओ विभाग के दलालों का नया फंडा

आरटीओ विभाग के दलालों का नया फंडाआरटीओ विभाग के दलालों का नया फंडा
Visfot News

लाइसेंस ऑनलाइन होते ही एजेंटों ने शुरू की घर पहुंच सेवा, आवेदकों के घर जाकर एजेंट खुद दे रहे टेस्ट और बना रहे लाइसेंस, ले रहे दोगुनी फीस, घर आकर खुद टेस्ट देकर बना रहे लाइसेंस, आवेदक को ट्रैफिक नियमों का ज्ञान हो या न हो
भोपाल। परिवहन विभाग द्वारा कामों को आसान और लोगों के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से जो ऑनलाइन लाइसेंस सुविधा शुरू की थी, अब उसका खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है। आरटीओ के एजेंट जो पहले आवेदकों को आरटीओ ऑफिस बुलाकर सेटिंग’ से टेस्ट में पास करवाने में मदद करते थे, अब वे आवेदकों के घर जाकर उनका टेस्ट देकर पास करवा रहे हैं। लाइसेंस की इस घर पहुंच सेवा से आवेदक तो खुश हैं, लेकिन इससे परिवहन विभाग का ट्रैफिक नियमों की जानकारी देने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
परिवहन विभाग ने चार माह के ट्रायल के बाद 1 अगस्त से भोपाल सहित पूरे प्रदेश में ऑनलाइन लर्निंग लाइसेंस की सुविधा शुरू की है। इसके तहत आवेदक घर बैठे ही विभाग की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आधार वेरिफिकेशन और फीस जमा करने के बाद टेस्ट देकर पास होने पर लाइसेंस प्राप्त कर सकता है। इसके लिए आवेदक को 20 सवालों में से कम से कम 12 का जवाब देना पड़ता है। पहले आवेदक को आरटीओ आकर 10 में से 6 सवालों का जवाब देना पड़ता था। ये सवाल ट्रैफिक नियमों से जुड़े होते हैं। विभाग का उद्देश्य है कि लाइसेंस मिलने से पहले आवेदक को परिवहन नियमों की अच्छे से जानकारी होना चाहिए। आरटीओ में आवेदक का टेस्ट कोई और नहीं दे पाता था, लेकिन अब घर बैठे लाइसेंस सेवा शुरू होने पर आरटीओ एजेंट आवेदकों से फीस से थोड़े ज्यादा पैसे लेकर उनके घर जा रहे हैं और उनके मोबाइल से पूरी प्रोसेस करने के साथ ही टेस्ट भी खुद ही देते हुए आवेदक को पास करवाने के साथ ही लाइसेंस निकालकर दे रहे हैं।
470 रुपए फीस, घर पहुंच लाइसेंस सेवा के 1000 रुपए
आरटीओ में लर्निंग लाइसेंस बनवाने की फीस 470 रुपए है। ऑनलाइन पेमेंट में भी आवेदक को यह फीस ऑनलाइन ट्रांसफर करना होती है, लेकिन एजेंट आवेदकों को जो घर पहुंच सेवा में पास करवाने तक की गारंटी दे रहे हैं, उसके लिए एक हजार रुपए शुल्क ले रहे हैं। कई आवेदक इसमें भी खुश हैं, क्योंकि उन्हें आरटीओ के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे और फेल होने का डर भी नहीं है, क्योंकि फेल होने पर फीस दोबारा जमा करना पड़ती है।
टेस्ट के समय हो वेबकैम या मोबाइल कैमरे से रिकार्डिंग
इस संबंध में परिवहन विशेषज्ञ और पूर्व परिवहन उपायुक्त संजय सोनी ने बताया कि नई व्यवस्था बहुत ही अच्छी है, लेकिन इसमें सही आवेदक ही टेस्ट दे इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए। आरटीओ में होने वाले टेस्ट में जहां टैबलेट के कैमरे में आवेदक की रिकार्डिंग तक की सुविधा होती थी, वैसे ही ऑनलाइन टेस्ट में भी वेबकैम या मोबाइल के फ्रंट कैमरे की मदद से आवेदक से टेस्ट लिया जा सकता है। इससे टेस्ट की अथेंटिसिटी भी बनी रहेगी।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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