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Tuesday, December 6, 2022
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धर्म के नाम पर धन के लिए हो रही भगवां वेशधारियों में जंग

Visfot News

छतरपुर। पिछले एक सप्ताह से छतरपुर जिले में धर्म के नाम पर धन के लिए भगवां वेशधारी बाबाओं के बीच घिनौने आरोप-प्रत्यारोप का विवाद चल रहा है। यह विवाद इतना बढ़ गया है कि अब बाबाओं के दो पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ न सिर्फ शिकायतें कर रहे हैं बल्कि पत्रकार वार्ताओं में एक-दूसरे पर आरोप भी लगा रहे हैं। विवाद की मूल जड़ कुछ मंदिरों की जमीनें हैं जिन पर दोनों पक्ष अपना हक जता रहे हैं। बाबाओं के बीच धन को लेकर चल रही यह लड़ाई धर्म को बदनाम करने का काम कर रही है। यह लड़ाई अगर और आगे गई तो हिन्दू धर्म के ये बाबा हास्य के पात्र बन जाएंगे।
इन बाबाओं के बीच है झगड़ा
श्रंगारी महाराज महंत जानराय टौरिया-
छतरपुर के जानराय टौरिया मंदिर के महंत श्रंगारी महाराज खुद को निर्मोही अखाड़े की परंपरा का नियुक्त महंत बताते हैं वे कहते हैं कि अखाड़े की परंपरा के अनुसार छतरपुर जिले में अखाड़े से संलग्र लगभग 40 मंदिर में पूजा अर्चना और इन मंदिरों से लगी जमीनों की देखरेख उनका दायित्व है। जानराय टौरिया के महंत का कहना है कि गढ़ीमलहरा मंदिर के अधीन आने वाला ग्राम मलका का बालाजी मंदिर अखाड़े की परंपरा का मंदिर है जहां पर अवैधानिक रूप से आशुतोष ब्रह्मचारी नामक बाबा ने कब्जा कर लिया है। ग्राम मलका के लोग इस मंदिर की 102 बीघा जमीन पर किए गए अवैध कब्जे और मंदिर में पूजा अर्चना न होने से दुखी होकर उनके पास आए थे इसलिए उन्होंने इस मंदिर पर अखाड़े का कब्जा दिलाने एवं आशुतोष ब्रह्मचारी की जांच कराने हेतु कलेक्टर को साधु संतों के साथ ज्ञापन सौंपा है। उधर आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस शिकायत के बाद जानराय टौरिया के महंत के खिलाफ भी हमला बोल दिया। उनके समर्थन में भोपाल के तिरंगा संगठन की कामिनी पाठक एवं उनके चाचा गुरू अनिल महाराज ने पिछले दिनों कलेक्टर को ज्ञापन दिया था और इस ज्ञापन में श्रंगारी महाराज पर अवैध रूप से महिलाओं को मंदिर में रखने, तीन बीबीयां रखकर बच्चे पैदा करने, जानराय टौरिया की संपत्ति पर दुकानें बनाकर बेचने एवं भण्डारे के नाम पर 10 लाख रूपए का वार्षिक घोटाला करने जैसे संगीन आरोप लगाए थे। सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में भी आशुतोष ब्रह्मचारी ने इन्हीं आरोपों को लगाते हुए जानराय टौरिया के महंत श्रंगारी महाराज की जांच कराने की मांग उठाई।
आशुतोष ब्रह्मचारी महंत मलका मंदिर
स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुए ग्राम मलका के बालाजी मंदिर में महंती देख रहे आशुतोष ब्रह्मचारी कहते हैं कि वे शैव सम्प्रदाय के साधु हैं। उनके चाचा अनिल महाराज काफी समय से मलका में देखरेख करते रहे। इसके बाद उन्हें वैधानिक रूप से महंती मिली थी। आशुतोष ब्रह्मचारी के मुताबिक मलका की 102 बीघा जमीन पर कब्जा करने के लिए जानराय टौरिया के महंत उनके खिलाफ साजिशें रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन मङ्क्षदरों में जमीनें हैं उन मंदिरों को जानराय टौरिया के महंत अपने अखाड़े का मंदिर बताकर गुण्डों के माध्यम से कब्जा करा लेते हैं और फिर अपने हिसाब से महंती देते हैं। मलका की जमीन पर भी जानराय टौरिया के महंत की नजर है इसीलिए सारा विवाद उपजा है। उधर आशुतोष ब्रह्मचारी पर भी निर्माेही अखाड़ा समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीताराम महाराज ने बीते रोज गंभीर आरोप लगाए। जानराय टौरिया के महंत के समर्थन में आशुतोष ब्रह्मचारी पर आरोप लगाते हुए सीताराम महाराज ने कहा कि खुद को ब्रह्मचारी कहने वाला आशुतोष ब्रह्मचारी कामिनी पाठक को पत्नि बनाकर रखे हुए है, उसकी एक बेटी भी है, उस पर अपनी ही बहिन को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का आरोप है। आशुतोष फर्जी तरीके से मलका मंदिर में कब्जा किए हुए है जबकि मलका मंदिर निर्मोही अखाड़े का मंदिर है।
अनिल गुर्जर ट्रस्टी गोराखुर्द मंदिर
सेामवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस में सागर जिले के बण्डा में स्थित देवजानकी रमण मंदिर गोराखुर्द के ट्रस्टी अनिल गुर्जर सामने आए। अनिल गुर्जर आशाराम बापू शिष्य मंडल के भी सदस्य हैं। उन्होंने श्रंगारी महाराज पर आरोप लगाए कि गोराखुर्द की करोड़ों रूपए की जमीन पर अखाड़े के नाम पर कब्जा करने की कोशिश हो रही है। वहीं श्रंगारी महाराज ने अनिल गुर्जर पर आरोप लगाए हैं कि अनिल गुर्जर ने देवजानकी मंदिर के मूल महंत 107 वर्षीय रामबालक दास को धोखे में रखकर उनसे मुख्त्यारनामा बनवाकर जमीन पर कब्जा कर लिया है।
रामदास महाराज, पूर्व महंत संकट मोचन मंदिर
इस प्रेस कांफ्रेंस में छतरपुर के संकट मोचन मंदिर के पूर्व महंत रामदास महाराज भी सामने आए। रामदास महाराज पर दुष्कर्म का एक मुकदमा विचाराधीन है जिसमें वे जमानत पर है। एक महिला को मंदिर में रखकर रेप के आरोप सामने आने के बाद जब उनकी गिरफ्तारी हुई तब उन्हें श्रंगारी महाराज निर्मोही अखाड़ा के द्वारा मंदिर की महंती से बेदखल कर दूसरे व्यक्ति को महंत बनाया गया था। अब रामदास कहते हंै कि श्रंगारी महाराज ने ही उनके विरूद्ध दुष्कर्म के मुकदमे की साजिश रचवाई थी ताकि संकट मोचन मंदिर की 65 एकड़ से अधिक जमीन पर श्रंगारी महाराज कब्जा कर सकें।
झगड़े की मूल जड़ धर्म नहीं करोड़ों की धन संपत्ति
बाबाओं के बीच चल रही इस लड़ाई के दौरान जो आरोप सामने आ रहे हैं उसके मुताबिक यह पूरा झगड़ा धर्म और अखाड़े की परंपराओं का नहीं है बल्कि संपत्तियों पर काबिज होने का झगड़ा है। तीन प्रमुख संपत्तियां हैं जिनको लेकर आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं।
गोराखुर्द में 20 करोड़ से अधिक की जमीन पर विवाद

  1. सागर जिले के बण्डा के समीप ग्राम गोराखुर्द में देवजानकी रमण मंदिर के पास लगभग 185 एकड़ जमीन है जिसकी बाजार कीमत 20 करोड़ रूपए से अधिक की है। जानराय टौरिया छतरपुर में पिछले एक माह से रह रहे 107 वर्ष आयु के संत रामबालक दास का आरोप है कि वे 70 वर्षों से उक्त मंदिर के महंत रहे हैं। सागर जिले के आशाराम बापू के शिष्य अनिल गुर्जर के द्वारा कुछ वर्षों पूर्व उक्त मंदिर के निर्माण और देखरेख के लिए एक ट्रस्ट बनाने की बात कहते हुए उनसे मुख्त्यारनामा लिखवाया था और इसके बाद इस जमीन पर एक ट्रस्ट बनाकर कब्जा कर लिया। इस जमीन पर अब आशाराम बापू के शिष्य मंडल का कब्जा है जबकि यह जमीन निर्मोही अखाड़े से जुड़े देवजानकी रमण मंदिर की संपत्ति है। इसी जमीन को लेकर अनिल गुर्जर भी सामने आए। साागर से सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस करने छतरपुर आए अनिल गुर्जर ने कहा कि वयोवृद्ध रामबालक दास का अपहरण कर उन्हें जानराय टौरिया में श्रंगारी महाराज के द्वारा रखा गया है। उन्होंने बताया कि गोराखुर्द की जमीन स्थानीय लोगों के द्वारा निर्मित ट्रस्ट के हाथों में वर्षों से है। दूर-दूर तक अखाड़े से इसका कोई संबंध नहंी है लेकिन अब श्रंगारी महाराज रामबालक दास के साथ मिलकर इस जमीन पर कब्जा करने के लिए कोर्ट कचहरी कर रहे हैं। उधर इस मामले में श्रंगारी महाराज का कहना है कि उक्त जमीन पर एडीजे कोर्ट सागर में मामला चल रहा है। एक वयोवृद्ध संत को जान से मारने की कोशिश करते हुए अनिल गुर्जर और उसके साथियों ने वहां से भगा दिया। संपूर्ण साधु समाज इस जमीन को आशाराम बापू के फर्जी ट्रस्ट से वापस लेकर रहेगा।
    जानराय टौरिया और संकट मोचन मंदिर की संपत्ति
  2. झगड़े की दूसरी वजह जानराय टौरिया मंदिर छतरपुर और इससे लगी हुई शहर के बीचोंबीच की करोड़ों रूपए की संपत्ति है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाए हैं कि श्रंगारी महाराज ने भगवानदास नाम के असली महंत को गायब करा दिया और खुद महंत बनकर इस संपत्ति को खुदबुर्द कर रहे हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि जानराय टौरिया की दुकानों को महंत के द्वारा महंगी पगड़ी लेकर बेचा जा रहा है जबकि यह पूरी संपत्ति कलेक्टर के अधीन होती है। इस संपत्ति की देखरेख और पूजा अर्चना के लिए महंत को वेतन पर रखा जाता है। इसी पत्रकारवार्ता में संकट मोचन मंदिर के पूर्व विवादित महंत रामदास भी सामने आए। उन्होंने भी आरोप लगाए कि संकट मोचन मंदिर की लगभग 65 एकड़ जमीन पर भी श्रंगारी महाराज कब्जा करने के लिए उन्हें रेप के एक फर्जी मुकदमे में फंसवा चुके हैं। उक्त दोनों संपत्तियां भी करोड़ों रूपए की हैं।
    मलका में मौजूद 102 बीघा जमीन
    झगड़े की शुरूआत जिस मंदिर और उसकी संपत्ति को लेकर शुरू हुई थी वह गढ़ीमलहरा क्षेत्र के ग्राम मलका में मौजूद है। इसको लेकर भी दोनों पक्षों के अलग-अलग आरोप हैं। करोड़ो रूपए की इस जमीन पर जानराय टौरिया के महंत श्रंगारी महाराज अखाड़े का दावा करते हैं जबकि यहां के कथित महंत आशुतोष ब्रह्मचारी कहते हैं कि वे वैधानिक तौर पर इस मंदिर के महंत हैं और संपत्ति की देखरेख उन्हें ही मिलनी चाहिए।
RAM KUMAR KUSHWAHA
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