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Friday, December 2, 2022
धर्म कर्म

बटुकभैरव मंत्र, कवच व प्रयोग

Visfot News

आचार्य ब्रजपाल शुक्ल, वृंदावन धाम
कलियुग में हनुमानजी के अलावा भैरव ही एकमात्र ऐसे देव हैं जिनकी पूजा तुरंत फल देती है। अगर सच्चे मन से उनकी पूजा की जाए तो वो अपने भक्तों की इच्छा पूरी करने में क्षण भर भी देर नहीं करते हैं। विशेष तौर पर यदि भैरवाष्टमी या अष्टमी के दिन तंत्र प्रयोग किए जाए या भगवान कालभैरव के मंत्रों का प्रयोग किया जाए तो निश्चित ही हर इच्छा पूरी होती है।पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच विवाद छिड़ गया कि उनमे से श्रेष्ठ कौन है यह विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि सभी देवता घबरा गए। उन्हें डर था कि दोनों देवताओं के बीच युद्ध ना छिड़ जाए और प्रलय ना आ जाए। सभी देवता घबराकर भगवन शिव के पास चल गए और उनसे समाधान ढूंढऩे का निवेदन किया। जिसके बाद भगवान शंकर ने एक सभा का आयोजन किया जिसमें भगवान शिव ने सभी ज्ञानी, ऋषि-मुनि, सिद्ध संत आदि और साथ में विष्णु और ब्रह्मा जी को भी आमंत्रित किया।इस सभा में निर्णय लिया गया कि सभी देवताओं में भगवान शिव श्रेष्ठ है। इस निर्णय को सभी देवताओं समेत भगवान विष्णु ने भी स्वीकार कर लिया। ब्रह्मा ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया। वे भरी सभा में भगवान शिव का अपमान करने लगे। भगवान शंकर इस तरह से अपना अपमान सह ना सके और उन्होंने रौद्र रूप धारण कर लिया।
भगवान शंकर प्रलय के रूप में नजर आने लगे और उनका रौद्र रूप देखकर तीनों लोक भयभीत हो गए। भगवान शिव के इसी रूद्र रूप से भगवान भैरव प्रकट हुए। वह श्वान (कुत्ते) पर सवार थे, उनके हाथ में एक दंड था और इसी कारण से भगवान शंकर को ‘दंडाधिपति भी कहा गया है। पुराणों के अनुसार भैरव जी का रूप अत्यंत भयंकर था। उन्होंने ब्रह्म देव के पांचवें सिर को काट दिया तब ब्रह्म देव को अपनी गलती का एहसास हुआ।
भैरव की पूजा से मिलते हैं ये लाभ नारदपुराण के अनुसार भैरव की पूजा करने से मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण होती है। यदि मनुष्य किसी पुराने रोग से पीडि़त है तो वह रोग, दुख और तकलीफ भी दूर हो जाएगी।यही नहीं यदि जीवन में शनि और राहु की बाधाएं आ रही हैं तो वह भी इनकी कृपा से दूर होगी। इनकी पूजा करने से डर से लडऩे की हिम्मत भी मिलती है। भैरवाष्टमी या कालाष्टमी के दिन पूजा उपासना द्वारा सभी शत्रुओं और पापी शक्तियों का नाश होता है और सभी प्रकार के पाप, ताप एवं कष्ट दूर हो जाते हैं। भैरव देव जी के राजस, तामस एवं सात्विक तीनों प्रकार के साधना तंत्र प्राप्त होते हैं। भैरव साधना स्तंभन, वशीकरण, उच्चाटन और सम्मोहन जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने के लिए कि जाती है। इनकी साधना करने से सभी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं भैरव आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होती है, व्यक्ति में साहस का संचार होता है। इनकी आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है, रविवार और मंगलवार के दिन इनकी पूजा बहुत फलदायी है। भैरव साधना और आराधना से पूर्व अनैतिक कृत्य आदि से दूर रहना चाहिए पवित्र होकर ही सात्विक आराधना की जाती है तभी फलदायक होती है। भैरव तंत्र में भैरव पद या भैरवी पद प्राप्त करने के लिए भगवान शिव ने देवी के समक्ष अनेक विधियों का उल्लेख किया जिनके माध्यम से उक्त अवस्था को प्राप्त हुआ जा सकता है। भैरव जी शिव और दुर्गा के भक्त हैं व इनका चरित्र बहुत ही सौम्य, सात्विक और साहसिक माना गया है न की डर उत्पन्न करने वाला इनका कार्य है सुरक्षा करना और कमजोरों को साहस देना व समाज को सही मार्ग देना।
1)-लोहबान, गूगल, कपूर, तुलसी, नीम, सरसों के पत्ते मिक्स करके सुबह-शाम घर में धूनी दें।
2)-भैरू जी के मंदिर में इमरती व मदिरा का भोग लगाएं।
3)-भैरू मंदिर में उड़द व सिद्ध एकाक्षी श्रीफल भैरू बाबा के समक्ष मन्नत मांग कर चढ़ाएं।
4)-काले कुत्ते को इमरती खिलाएं व कच्चा दूध पिलाएं।
5)-शुभ कामों में बार-बार बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार के दिन भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ाएं और बटुक भैरव स्तोत्र का एक पाठ करें।
6)-महाकाल भैरव मंदिर में चढ़ाए गए काले धागे को गले या बाजू में बांधने से भूत-प्रेत और जादू-टोने का असर नहीं होता।वो मत्रित्र होना चाहिये
7)-रोली, सिन्दूर, रक्तचन्दन का चूर्ण, लाल फूल, गुड़, उड़द का बड़ा, धान का लावा, ईख का रस, तिल का तेल, लोहबान, लाल वस्त्र, भुना केला, सरसों का तेल भैरव जी की प्रिय वस्तुएं हैं। इन्हें भैरव जी पर अर्पित करने से मुंह मांगा फल प्राप्त किया जा सकता है।
8)-प्रतिदिन भैरव मंदिर की आठ बार प्रदक्षिणा करने से पापों का नाश होता है।
9)-भगवान भैरव का वाहन कुत्ता है इसलिए कुत्ते की भी पूजा की जाती है। कहते हैं कि अगर कुत्ता काले रंग का हो तो पूजा का माहात्म्य और बढ़ जाता है। कुछ भक्त तो उसे प्रसन्न करने के लिए दूध पिलाते हैं और मिठाई खिलाते हैं।
सभी प्रकार की तंत्र बाधाओं के लिए ये प्रयोग है,।
अमावस्या, कृष्ण पक्ष मे अष्टमी/ त्रयोदशी/चतुर्दशी या सावन माह की किसी भी रात्रि करें।
अपने सामने एक सूखा नारियल , एक कपूर की डली , 11 लौंग 11 इलायची, 1 डली लोबान या धुप रखें।
सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
हाथ में नारियल लेकर अपनी मनोकामना बोलें। नारियल सामने रखें।
दक्षिण दिशा कीओर देखकर इस मन्त्र का 108 बार जाप करें।
अगले दिन जल प्रवाह करें।
।। भ्रां भ्रीं भ्रूं भ्र:। ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्र:।ख्रां ख्रीं ख्रूं ख्र:।घ्रां घ्रीं घ्रूं घ्र:। म्रां म्रीं म्रूं म्र:। म्रों म्रों म्रों म्रों। क्लों क्लों क्लों क्लों।श्रों श्रों श्रों श्रों। ज्रों ज्रों ज्रों ज्रों। हूँ हूँ हूँ हूँ। हूँ हूँ हूँ हूँ। फट। सर्वतो रक्ष रक्ष रक्ष रक्ष भैरव नाथ हूँ फट।।
श्री बटुक भैरव मंत्र,…
ऊं ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं
बटुक भैरव कवच …….
सहस्त्रारे महाचक्रे कर्पूरधवले गुरु:।
पातु मां बटुको देवो भैरव: सर्वकर्मसु ॥
पूर्वस्यामसितांगो मां दिशि रक्षतु सर्वदा।
आग्नेयां च रुरु: पातु दक्षिणे चण्ड भैरव: ॥
नैॠत्यां क्रोधन: पातु उन्मत्त: पातु पश्चिमे।
वायव्यां मां कपाली च नित्यं पायात् सुरेश्वर: ॥
भीषणो भैरव: पातु उत्तरास्यां तु सर्वदा।
संहार भैरव: पायादीशान्यां च महेश्वर: ॥
ऊध्र्वं पातु विधाता च पाताले नन्दको विभु:।
सद्योजातस्तु मां पायात् सर्वतो देवसेवित: ॥
रामदेवो वनान्ते च वने घोरस्तथावतु।
जले तत्पुरुष: पातु स्थले ईशान एव च ॥
डाकिनी पुत्रक: पातु पुत्रान् में सर्वत: प्रभु:।
हाकिनी पुत्रक: पातु दारास्तु लाकिनी सुत: ॥
पातु शाकिनिका पुत्र: सैन्यं वै कालभैरव:।
मालिनी पुत्रक: पातु पशूनश्वान् गंजास्तथा ॥
महाकालोऽवतु क्षेत्रं श्रियं मे सर्वतो गिरा।
वाद्यम् वाद्यप्रिय: पातु भैरवो नित्यसम्पदा ॥
।।सम्पूर्ण।।
बाबा भैरवनाथ आपकी मनोकामना पूरी करें,..
…..जय श्री महाकाल….

RAM KUMAR KUSHWAHA
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