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Friday, December 2, 2022
डेली न्यूज़धर्म कर्म

महासंग्राम के बाद भगवान श्रीराम ने अधर्म के स्वरूप रावण का किया वध

महासंग्राम के बाद भगवान श्रीराम ने अधर्म के स्वरूप रावण का किया वध

महासंग्राम के बाद भगवान श्रीराम ने अधर्म के स्वरूप रावण का किया वधमहासंग्राम के बाद भगवान श्रीराम ने अधर्म के स्वरूप रावण का किया वध
Visfot News

लाल कड़क्का रामलीला में संपन्न हुई रावण वध की लीला
छतरपुर। शहर के महल तिराहे पर श्री लाल कड़क्का रामलीला समिति द्वारा आयोजित की जा रही रामलीला में भगवान राम और अधर्म के स्वरूप रावण के बीच महायुद्ध हुआ। जब किसी तरह से भी रावण परास्त नहीं हो रहा था तो भगवान राम ने रावण के भाई विभीषण से सुझाव मांगा। इस पर विभीषण ने भगवान राम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत कुंड है, यदि वाण उसकी नाभि पर चलाया जाए तो उसका अंत निश्चित है। तदोपरांत भगवान राम ने रावण की नाभि पर तीर मारकर उसका अंत किया। लीला देखने पहुंचे धर्मप्रेमियों ने इस दौरान जमकर जय श्रीराम के नारे लगाए।
यह कलाकार निभा रहे किरदार
रामलीला में गणेश जी का किरदार सक्षम पटैरिया, राम जी का किरदार शिवम चतुर्वेदी, अंकित चतुर्वेदी, रंजीत शर्मा, लक्ष्मण जी का किरदार देवांश चतुर्वेदी, केशव चतुर्वेदी, भरत जी- शिवांश पाठक, शत्रुघन जी- उदित नारायण, सीता- सुमित अवस्थी, ब्रह्मा जी -सुरेन्द्र कुमार चतुर्वेदी, अंगद- अंकित गुप्ता, विश्वामित्र-मुकेश सेन, परशुराम- ओम नारायण चतुर्वेदी, ताड़का- जागेश्वर जाटव, सुग्रीव-अमन रावत, रावण- हर्षदीप शर्मा, बालि-आशीष बिंदुआ, इन्द्रजीत-आशुतोष चतुर्वेदी, रावण सुत- अर्जुन रैकवार, जनक- रमाशंकर चतुर्वेदी, बाणासुर का किरदार नरेन्द्र कुमार चतुर्वेदी निभा रहे हैं। इसके अलावा पेटू राजा – विनोद मिश्रा, हास्य कलाकार-देवेन्द्र कुशवाहा, विनोद मिश्रा, मकरध्वज- पार्थ अरजरिया, सुमंत-किशोरी लाल पाल, कुम्भकरण एवं मारीच-एल.पी.कुशवाहा, दशरथ- देवकीनंदन तिवारी, श्रंगारी – देवेन्द्र कुशवाहा, अहिरावण- सीताराम चौबे, मंत्री-रमेश दुबे, सूर्पणखा, केकई-राजू माली, केवट-रमाशंकर चतुर्वेदी, अतिकाय-देवांश चतुर्वेदी, भारत माता, सीता सखी-कु. राधिका गुप्ता, हनुमान जी – सक्षम पटैरिया और ओम नारायण चतुर्वेदी बने हुए हैं। कथा व्यास देवनाथ पाठक और राम सिंह बाबाजी हैं। हारमोनियम वादक-रमेश अग्रवाल,ढोलक मास्टर-रामस्वरूप रैकवार और तबला वादक- अनिल भट्ट हैं।
यह है श्री लाल कड़क्का रामलीला का इतिहास
छतरपुर नगर की सबसे प्राचीन श्री लाल कड़क्का रामलीला का महाराज विश्वनाथ सिंह जू देव छतरपुर के द्वारा सन् 1897 में प्रारंभ की गई थी। इसी वर्ष महाराजा साहब को महाराज की पदवी से नवाजा गया था। इसी उपलक्ष्य में महाराज विश्वनाथ सिंह जू देव द्वारा रामलीला एवं रहस लीला प्रारंभ की गई। जिसका दायित्व उन्होंने लाल कड़क्का मंदिर महंत मुंशी नरसिंह नारायण स्वामी को सौंपा और तब से लेकर अब तक लगभग 124 वर्षों से अनवरत रामलीला का मंचन किया जा रहा है। महाराज विश्वनाथ सिंह जू देव के बैकुंड वास के बाद राज्य की बागाडेार महाराज भवानी सिंह जू देव के हाथों में आई और उन्होंने भी इस रामलीला को सतत् जारी रखते हुए संचालन करने का दायित्व महंत बालकदास का सौंपा। इसी प्रकार बालक दास के बाद महंत जगन्नाथदास, महंत हरप्रसाद, महंत अनंतदास के उपरांत जुम्मन मामू और स्वरूपचंद्र जैन के द्वारा रामलीला संपन्न कराई जाती रही। वर्तमान में रामलीला का दायित्व पंजीकृत संस्था लालकड़क्का रामलीला समिति के द्वारा किया जा रहा है।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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