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Sunday, September 25, 2022
डेली न्यूज़

20 वर्षों से जारी जल एवं वायु प्रदूषण को रोकने में प्रशासन नाकाम

Visfot News

MINTU SAHU

(शिकारपुरा के ग्रामीणों का शिकार करने को आतुर शराब फैक्ट्री का जहरीला पानी)

साल दर साल घट रही पैदावार और बढ़ रही बीमारी

नोटिस शब्द अधिकारियों का कारगार अस्त्र

अंग्रेजों ने भारत को भौतिक रूप से जरूर आजाद कर दिया है | लेकिन आर्थिक गुलामी अभी भी चली आ रही है | वही विरोध को ताकत के साथ कुचला जाता था | आज वही काम नोटों की गड्डियां कर रही हैं | जिसका नतीजा है कि शराब फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा प्रदूषण नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे| और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नोटिस भेजने तक सीमित है | जिसे रोक पाने में बोर्ड नाकाम है| समय रहते इस सख्त कार्यवाही नहीं की गई तो इसके दूरगामी परिणाम भयानक साबित होंगे|

नौगांव/ एक समय था कि जिस पानी ने कई गुना पैदावार बढ़ाकर किसानों को गदगद किया वही अब उन्हें खून के आंसू रुला रहा है | अब उपज कम हो रही और जमीन भी बंजर होती जा रही है| शराब फैक्ट्री के प्रबंधन द्वारा सीलप नदी में 20 वर्षों से सतत कैमिकल युक्त जहरीला पानी बहाये जाने एवं दुर्गंध ने लोगों को परेशान कर दिया है| जिसको लेकर स्थानीय प्रशासन जिला प्रशासन ,आबकारी विभाग एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों का कई बार ध्यान भी आकृष्ट कराया गया और शिकायतें भी की गई लेकिन हर कार्यवाही नोटिस तक सीमित होकर रह जाती है|
विदित हो कि नगर से 3-4 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम शिकारपुरा के निकट संचालित शराब फैक्ट्री का कैमिकल युक्त पानी उस नदी में बहाया जा रहा है | वो भी 20 वर्षों से जिसका पानी किसानों की उपज की पैदावार में अहम भूमिका निभाता है | वहीं शहर की हवा से दूर गांव की हवा में दुर्गंध फैलाने में यह शराब फैक्ट्री लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है| नदी में जहरीले पानी के साथ फैक्ट्री का कचरा और राख का ढेर भी नदी में बहाया जा रहा है| जिसको लेकर एक बार फिर नगर युवा कांग्रेस व ग्राम के किसानों ने कांग्रेस नगरपालिका उपाध्यक्ष के नेतृत्व में एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुये | वायु एवं जल प्रदूषण पर रोक लगाये जाने की मांग की थी | और प्रशासन ने फिर मामले को नोटिस तक सीमित कर दिया है | बीते 20 वर्षों के दौरान कई अधिकारी व जिला कलेक्टर आये और गये | लेकिन कोई भी सख्त कार्यवाही की जुर्रत नहीं कर पाया|
गौरतलब है कि शराब फैक्ट्री से निकलने वाला कैमिकल युक्त पानी फसलों को प्रभावित कर रहा है | साथ ही लोगों के सेहद के साथ खिलवाड़ भी किया जा रहा है | किसानों ने बताया कि एक एकड़ के खेत में 3 बार पानी डाला और यूरिया का भी इस्तेमाल किया लेकिन उपज पिछले साल से भी कम मिल पायी | स्थिति यह है कि शराब फैक्ट्री का जहरीला पानी किसानों व ग्रामीणों के लिये जी का जंजाल बन गया है | अब खेतों में नदी का प्रदूषित पानी डालना मुसीबत हैं| इस उलझन का इलाज कराने की शिकायतें भी की गई | लेकिन आज तक ऐसी कार्यवाही नहीं की गई| जिसकी चर्चा की जा सकें| फैक्ट्री में काम कर चुके कर्मचारियों ने बताया कि मंथली सिस्टम के चलते फैक्ट्री संचालक नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है| प्रदूषण नियंत्रण के एक भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा हैं| वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट महज दिखावा है | मंथली सिस्टम का नतीजा है| कि जिम्मेदार अधिकारी फैक्ट्री संचालक की नजर में वफादार रहे इसलिए अपना पूरा अनुभव प्रकट कर देते है | जिसका नतीजा है | कि उनके खेतों का वह जीवन बन गया है जिसकी फसल जहर के रूप में कट रही हो|

. (हवा में दुर्गंध)

फैक्ट्री के दूषित जहरीले पानी से खेती किसानी करने वाले अन्नदाताआ परेशान है |वहीं शराब बनाने से बची शेष गैस को हवा में छोड़ दिया जाता है| |जिससे सांस लेने से परेशानी होती है | वायु एवं जल प्रदूषण रोकने के लिये नियमानुसार जो सिस्टम लगाये जाने चाहिये| उनका इस्तेमाल प्रबंधन नहीं कर रहा | फैक्ट्री में ऑटोमेटिम सिस्टम ईपीटी की व्यवस्था नहीं है| जिससे गंभीर बीमारियों के बढ़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है| लेकिन कोई भी मामले से जुड़े अधिकारी रोकने के प्रति गंभीर नहीं है|

नोटिस शब्द बड़े काम का

पुलिस अधिकारियों के लिये जिस तरह लाइन हाजिर शब्द बड़े काम का है | ठीक उसी प्रकार नोटिस शब्द अधिकारियों के लिये किसी अस्त्र से कम नहीं| नोटिस शब्द अंग्रेजों के जमाने का है| मगर है | बड़े काम का खासकर जब जनता किसी मामले को लेकर अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है | तब नोटिस शब्द का इस्तेमाल अधिकारीयो को सुकून देता है |और विरोध करने वाले भी यह सोचकर सुकून महसूस करते हैं | कि नोटिस जारी कर कार्यवाही शुरू हो गई है| मगर हकीकत कुछ और ही होती है| दरअसल विरोधियों को शांत कराने और मामले से जुड़े बड़े रसूखदारो को बचाने का यह कारगार हथियार बन गया है| जिसका प्रमाण है | कि स्थानीय प्रशासन ने आनन-फानन में मामले से जुड़े विभागीय अधिकारियों को नोटिस जारी कर दस दिनों में स्पष्टीकरण देने के लिये कहा गया था | लेकिन किसी ने अभी तक स्पष्टीकरण नहीं दिया |

  अधिकारियों पर नियंत्रण नहीं

क्राइम करप्शन और कम्यूनजिलन से किसी भी सूरत में समझौता न करने वाली प्रदेश की भाजपा सरकार का अपने ही अधिकारियों पर नियंत्रण नहीं है| जिसका जीता जागता गवाह है| शराब फैक्ट्री जहां पर प्रबंधन बीते 20 वर्षों से वायु एवं जल प्रदूषण हो रहा है | लेकिन दोनों प्रमुख दलों की सरकारों ने शराब फैक्ट्री के प्रदूषण पर रोक लगाने में रुचि नहीं ली और आज भी खुले आम प्रदूषण के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं | अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर गौर करें तो 80 फ़ीसदी बीमारियां और मौतों के पीछे जल प्रदूषण ही जिम्मेदार होता है| हैजा ,पीलिया ,टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों से बचने स्वच्छ जल पीना जरूरी है |लेकिन अधिकारियों में कभी भी कार्यवाही को अंजाम तक नहीं पहुंचाया और नोटिस जारी कर अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं| जिससे आने वाली समय में आसपास के गांव भी चपेट में आ सकते है | शायद अधिकारियों एवं प्रबंधन को इस बात का पता नहीं है | कि ऐसे मामलों के दूरगामी परिणाम भयानक और विपरीत होते है | मतलब किस प्रकार कोई मां अपने रोते बच्चे को अफीम चटा देती है | ताकि मां शांत होकर काम कर सके लेकिन इसके परिणाम बहुत ही खतरनाक होते है | इसी तरह जिम्मेदार विभागीय अधिकारी अफीम की जगह नोटिस का सहारा ले रहे है क्षेत्र के सामाजिक कार्यों से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस प्रकार रवैया अपनाया जा रहा है उससे लगता है कि पूरा मामला राजनैतिक प्रशासनिक और धन तंत्र से उलझ कर रह गया है|

ritish ritishsahu
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