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Saturday, November 26, 2022
खास समाचारमध्यप्रदेश

कोयले की कमी से सिंगाजी की एक इकाई में उत्पादन ठप्प

कोयले की कमी से सिंगाजी की एक इकाई में उत्पादन ठप्प

कोयले की कमी से सिंगाजी की एक इकाई में उत्पादन ठप्पकोयले की कमी से सिंगाजी की एक इकाई में उत्पादन ठप्प
Visfot News

भोपाल। प्रदेश में कोयला संकट के बीच रविवार को खंडवा जिला स्थित सिंगाजी ताप विद्युत केंद्र की एक इकाई से उत्पादन ठप्प हो गया। इस इकाई के बंद होने का असर मप्र के बिजली उत्पादन पर पडा। रविवार को प्रदेश के चारों ताप विद्युत केंद्रों में महज 1,530 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ है, जो शुक्रवार की तुलना में 783 मेगावाट, तो पिछले 17 दिनों में सबसे कम उत्पादन है। यदि केंद्रों की क्षमता 5,400 मेगावाट के मुकाबले में देखें, तो प्रदेश में रविवार को 28.33 फीसद ही बिजली बनाई जा सकी है। इतना ही नहीं, दूसरे संयंत्रों में भी उत्पादन प्रभावित हुआ है। प्रदेश में रविवार को 9,345 मेगावाट मांग की तुलना में महज 1,530 मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ है। जल विद्युत परियोजनाओं के उत्पादन 1,414 मेगावाट को भी मिला लें, तो 2,944 मेगावाट होता है। हालांकि ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को दावा है कि रविवार को भी मांग के मुताबिक बिजली सप्लाई की गई है।

सरकार ने सेंट्रल ग्रिड से 6,311 मेगावाट बिजली मांगी थी, इसके विरुद्ध 6,003 मेगावाट बिजली ड्रा की गई है नी रविवार को ओवर ड्रा जैसी स्थिति नहीं बनी है, पर ऐसी सूरत (जब बिजली उत्पादन घटा हो, ओवर ड्रा नहीं हुआ हो) में मांग के मुताबिक बिजली सप्लाई होना भी असंभव लगता है। प्रदेश के सभी ताप विद्युत केंद्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। पिछले 17 दिनों से औसत 500 मेगावाट उत्पादन करने वाले सारणी संयंत्र में रविवार को महज 287 मेगावाट (21.57 फीसद) बिजली बनाई गई है।तो दो दिन पहले तक क्षमता से तीन मेगावाट ज्यादा उत्पादन करने वाले अमरकंटक चचाई संयंत्र में 120 मेगावाट बिजली बनी है। 1,320 मेगावाट क्षमता वाली सिंगाजी द्वितीय इकाई में महज 197 मेगावाट उत्पादन हुआ है। प्रदेश में सिर्फ सिंगाजी प्रथम इकाई ही ऐसी है, जिसमें 682 मेगावाट बिजली बनाई जा सकी है। सिंगाजी संयंत्र में कोयले की कमी का यह आलम है कि बुरे वक्त के लिए संभाल कर रखे जाने वाले दूसरे चरण के कोयले से उत्पादन किया जा रहा है। संयंत्र में पहले चरण का कोयला खत्म हो गया है। शनिवार को संयंत्र की चारों इकाईयों के लिए तीन रैक (16654 टन) कोयला पहुंचा है। जबकि खपत 42 हजार 986 टन हुई है। इतना ही नहीं, गीला और घटिया कोयला आने के कारण कर्मचारियों को संयंत्र चलाने में न सिर्फ असुविधा हो रही है, बल्कि बिजली भी 35 से 40 फीसद महंगी पड़ रही है। कोयला संकट के कारण मध्य प्रदेश बिजली संकट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उधर सरकार कई मौकों पर कोयला संकट की खबरों को नकार चुकी है। सरकार का कहना है ?कि उसके पास कोयले का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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