Please assign a menu to the primary menu location under menu

Saturday, November 26, 2022
धर्म कर्म

मं‎दिरों में शुरु हुई सावन सोमवार की तैयारियां

Visfot News

श्रावण मास की शुरुआत हो जाएगी 25 जुलाई से
भोपाल। राजधानी के मं‎दिरों में सावन सोमवार की तैया‎रियां प्रारंभ हो चुकी है। यह माह भगवान भोलेनाथ व माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना के लिए जाना जाता है। श्रावण मास की शुरुआत 25 जुलाई से हो जाएगी। शहर के शिवालयों में अभी से इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्राचीन बड़वाले महादेव मंदिर, गुफा मंदिर सहित सभी प्रसिद्ध मंदिरों में खास इंतजाम किए जा रहे हैं। चूंकि यह कोरोना काल है, लिहाजा ऐसी व्‍यवस्‍था की जा रही है कि मंदिरों में भक्‍तों के बीच सुरक्षित शारीरिक दूरी कायम रह सके। यानी सीमित संख्‍या में ही मदिरों में भक्तों को प्रवेश मिलेगा। इसके लिए मंदिरों में बैरिकेडिंग करने के साथ ही गोल घेरे भी बनाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार श्रावण मास के पहले सोमवार को लेकर राजधानी के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में तैयारी जोर-शोर से चल रही है। इस बार भक्‍तगण दूर से ही भगवान के दर्शन कर सकेंगे। मंदिरों में शिव पूजा व अभिषेक होंगे, जिन्हें पुजारी ही संपन्न करेंगे। तो वहीं इस बार राजधानी में होने वाले सामूहिक शिवलिंग निर्माण नहीं किए जाएंगे। भक्त अपने घरों पर ही शिललिंग बना सकेंगे। मां चामुंडा देवी दरबार के पुजारी पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि श्रावण माह की शुरूआत विशेष योग में हो रही है। श्री बड़वाले महादेव मंदिर सेवा समिति द्वारा श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर श्रावण महोत्सव के दौरान बाबा बटेश्वर का अलौकिक श्रृंगार किया जाएगा। गुफा मंदिर परिसर में हर साल सावन का मेला लगता है, लेकिन इस बार न तो मेला लगेगा और न ही झूले डलेंगे। शिवालय में जल चढ़ाने सीमित संख्या में ही भक्तों को प्रवेश दिया जाएगा। सभी कोरोना गाइडलाइन का पालन कर सकें, इसकी निगरानी कार्यकर्ता करेंगे। पिपलेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण सोमवार पर झूले व दुकानें नहीं लगाई जाएगी। श्रद्धालुओं को सिर्फ दर्शन व जल चढ़ाने की अनुमति रहेगी। भोपाल के राजा कहे जाने वाले भगवान मुक्तेश्वर महाकाल की सावन माह में रोजाना सुबह 5 बजे भस्म आरती होगी और अलौकिक शृंगार किया जाएगा। मंदिर के मुख्य पुजारी गोपाल कृष्ण पुरोहित ने बताया कि इस बार कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए भक्त ऑनलाइन भस्म आरती का दर्शन कर सकेंगे।

RAM KUMAR KUSHWAHA
भाषा चुने »