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Friday, December 2, 2022
मध्यप्रदेश

बकस्वाहा के शासकीय नवीन महाविद्यालय मे व्यवस्थायें ठप्प

Visfot News

छतरपुर      
जगह जगह गंदगी का आलम, पशूओ ने डाला डेरा पढाई के नाम पर सप्ताह मे मात्र एक या दो दिन लगती है क्लास शासकीय नवीन महाविद्यालय  बकस्वाहा हर बार अपने कार्यक्रमो को लेकर सुर्खियां बटोरने के चक्कर मे रहता है और इन कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी कमियां छुपाते नजर आता है। जब कालेज की असलियत जनाने का प्रयास किया गया तो सच्चाई कुछ निकली।.    

शासकीय नवीन महाविद्यालय मे लगभग एक हजार छात्र – छात्राएं अध्ययनरत है जबकि इनको पढाने के लिये लगभग तेरह लोगो का स्टाप नियुक्त है  जिसमे प्राचार्य के अलावा आठ स्थाई साहयक प्राध्यापक, तीन अतिथि विद्वान, एक क्रीड़ा अधिकारी, एक ग्रंथपाल नियुक्त है  साफ-सफाई के लिये एक स्वीपर को भी रखा गया है।

पढाई की चरमराती व्यवस्था
नवीन महाविद्यालय विधालय के छात्र नीलेश, प्रदीप, चतुर, दुर्गा, रत्नेश, कपिल की माने तो सप्ताह मे मात्र दो या तीन दिन ही क्लास लगती है  जिसका परिणाम परीक्षा परिणाम मे देखने को मिलता है। छात्रो की माने तो इस बार पहली साल (फस्ट ईयर) के परीक्षा परिणाम पर अगर नजर की जाये तो तीन सौ पचास छात्रो मे से मात्र पचास छात्र – छात्राएं का परिणम ही सन्तोष जनक रहा है उन्चास छात्र – छात्राओ को सप्लिमेन्टिर्री का शिकार होना पढा है। जबकि बाकी छात्रो  को परीक्षा परिणाम सुधारने का भरोसा दिया गया है।

भवन हो रहा छतिग्रस्त
शासकीय नवीन महाविद्यालय के निर्माण मे ध्यान न देने के कारण छटिया तरीके से हुये निर्माण की पोल खुलने लगी है। धीरे धीरे भवन मे दरारे आने लगी है और वर्षात मे भवन मे बहुत सारी जगह से पानी टपकता है।

आवारा पशुओ का डेरा व गदंगी का अंबार
शासकीय नवीन महाविद्यालय अपने कु प्रबंधन का शिकार होता नजर आ रहा है। महाविद्यालय की अंदर की  दिवालो पर गुटके और पान की पीक के निशान तो है ही साथ ही कोनो मे कचारे के ढेर लगा रख्खे है।नवीन बिधालय के प्रांगड के अंदर पशुओ ने डेरा जमा रख्खा है। इस पर महाविद्यालय के प्रबंधन पर सवाल उठना लाजमी है।. छात्र छात्राओं को बैठने के लिये टेबिल कुर्सी की आज तक व्यवस्था पूर्ण नही हो पाई है ।
इन सब मामले मे शासकीय नवीन महाविद्यालय के प्राचार्य शिवंम शुक्ला कहते है कि  महाविद्यालय मे पढाई के लिये निरंतर क्लास लगाई जा रही है।  महाविद्यालय के एक ओर बाऊन्ड्रीबाल नही है इस वजह से आवारा मवेशियों का जमावड़ा रहता है, पान गुटका खाने न खाने को  छात्रो को लगातार निर्देशित किया जाता है और उनके पास पाऊच पाये जाने पर बाहर फिकवायाने के बाद ही छात्रो को प्रवेश दिया जाता है। छात्रो को बैठने के लिये कुर्सी टेबिल के लिये उच्च अधिकारियों को पत्र लिख कर मॉग की गयी है। पिछले सत्र का परीक्षा परिणाम छ्यासी परसेन्ट रहा था।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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