Please assign a menu to the primary menu location under menu

Tuesday, December 6, 2022
धर्म कर्म

मनुष्य को कितनी उम्र से कितनी उम्र तक ग्रह परेशान करते हैं ? तथा इनको शान्त करने के लिए सही उपाय क्या हैं?

Visfot News

आचार्य ब्रजपाल शुक्ल, वृन्दावन धाम
यही प्रश्न महाभारत के वनपर्व के अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्या पर्व के 230 वें अध्याय मेंं युधिष्ठिर ने मार्कण्डेय ऋषि से पूंछा है ।
इसी अध्याय के 22 वें तथा 57 वें श्लोक में बताया है कि-
यावत् षोडश वर्षाणि भवन्ति तरुणा: प्रजा: ।
प्रबाधत मनुष्याणां तावद रूपै: पृथग् विधै: ।। 22 ।।
शिवपुत्र कार्तिकेय स्कन्द ने बताया कि जन्म से लेकर 16 वर्ष तक की आयु तक मनुष्य को बालग्रह ही अनेक रूपों को धारण करके संताप देते हैं ।
228 अध्याय के 10 श्लोक में शिशुओं की सात माताएं बताईं हैं ।
काकी च हलिमा चैव मालिनी बृंहता तथा ।
आर्या पलाला वैमित्रा सप्तैता: शिशुमातर: ।।10 ।।
1- काकी
2- हलिमा
3- मालिनी
4- बृंहता
5- आर्या
6- पलाला
7- वैमित्रा
ये सात माताएं शिशु को दुख भी देतीं हैं ।कभी कभी तो गर्भ में ही मार डालतीं हैं ।संसार में प्रसिद्ध है कि वैमाता बच्चों को रुलातीं हंसातीं हैं । 16 वर्ष तक की आयु तक शनि आदि ग्रह नहीं लगते हैं ।इनको यही ग्रह हैं ।
इनका उपाय 230 अध्याय के 44 श्लोक में बताया है कि-
तेष़ां प्रशमनं कार्यं स्नानं धूपमथाञ्जनम् । बलिकर्मोपहाराश्च स्कन्देज्या विशेषत: ।।44 ।।
स्नान, धूप ,धूप बलिकर्म ,उपहार अर्पण करके स्कन्ददेव की पूजा करने से ये शांत हो जाते हैं ।
अब देखिए ।बालक या बालिका के 16 वर्ष के बाद “देवग्रह ,पितृग्रह , सिद्ध ग्रह , राक्षस ग्रह ,गन्धर्व ग्रह ,पिशाच ग्रह ,औऱ यक्षग्रह लगते हैं ।इन ग्रहों से मनुष्य पागल भी हो जाते हैं ।रोगी भी हो जाते हैं ।खाने पीने ,सूंघने के पदार्थों में बैठकर ग्रह मनुष्य को पीडि़त करते हैं ।
अब देखिए कि कब तक करते हैं ।
यावत् सप्तति वर्षाणि भवन्त्येते ग्रहा नृणाम् ।
अत: परं देहिनां तु ग्रहतुल्यो भवेज्वर: ।।57 ।।
70 वर्ष की आयु तक ही ग्रह लगते हैं ।फिर तो वृद्धावस्था ऐसा ग्रह है कि मृत्यु पर्यन्त पीडि़त करता है ।
अब देखिए कि ये ग्रह किसको परेशान नहीं करते हैं ।
अप्रकीर्णेन्द्रियं दान्तं शुचिं नित्यमतन्द्रितम् ।
आस्तिकं श्रद्दधानं च वर्जयन्ति सदा ग्रहा: ।।58 ।।
जो मनुष्य अपनी जिह्वा को नियंत्रण में रखता है ।अशुद्ध औऱ हर किसी के हाथ का बनाया हुआ नहीं खाता है ।बासा औऱ अपवित्र भोजन नहीं करता है ।इंद्रियों को संयमित रखता है ।प्रात:काल जागता है ।आस्तिक है ।माता पिता गुरू देवता ,सभी में श्रद्धा सहित व्यवहार रखता है ।उसे पुरुष से ये ग्रह दूर ही रहते ।भगवान के भक्तों को ग्रह नहीं लगते हैं ।अपवित्र भोजन करने वाले के पीछे पीछे ही ग्रह चलते हैं ।सूर्योदय तक सोनेवाले के साथ ही सोते हैं ।ऐसे मनुष्य का पतन कर देते हैं ।

RAM KUMAR KUSHWAHA
भाषा चुने »