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Saturday, April 20, 2024
धर्म कर्म

गुरुपूर्णिमा पर विशेष

Visfot News

आचार्य ब्रजपाल शुक्ल, वृंदावन धाम
गुरुस्तव:
(1) जगत,जीव,ईश्वर,परब्रह्म, माया,
मिले,एक होकर जगत को रचाया ।
धरा रूप गुरु का प्रभू ने धरा में,
तब दे ज्ञान मानव को दुख से बचाया।।
(2) मानव जब तन धन के सुख लोभ में ही,
और परिवार के मोह में जब बंधाया।
रोते विलखते जब प्रभु को पुकारा,
तब दे ज्ञान मानव को दुख से बचाया।।
(3) नारी बना जीव, नर में फंसा है,
और नर जीव नारी के तन में फंसाया।
जब सन्तान के पालने पोषने में,
गई आयु सारी समझ भी न पाया।
निकट आई मृत्यु तो रोने लगा जब,
तब दे ज्ञान मानव को दुख से बचाया।।
(4) गुरूरूप धारण किया जब प्रभू ने,
तो बचना है कैसे ये करके दिखाया।
संयम, नियम,व्रत गृहस्थी में रहके,
कर्तव्य ऐसे करो ये सिखाया।।
माया में भटके हुए जीव को तब,
ये दे ज्ञान मानव को दुख से बचाया।।
(5) साधू बने, साधुओं को सिखाया,
स्वयं त्याग, वैराग्य, कर कर बताया।।
विश्वास, श्रद्धा ,अरु भक्ती जगाकर,
तब दे ज्ञान मानव को दुख से बचाया।।
(6) गुरूरूप प्रभु का समझ जो न पाए,
वो माया के बंधन से न छूट पाए।
बिना ज्ञान भक्ती के मानव दुखी हो,
न सुख ही मिलेगा, न वो शान्ति पाए।।
गुरूरूपधारी, प्रभू को नमन है,
जिन्होंने मुझे ज्ञान देकर बचाया।
विश्वास, श्रद्धा अरु भक्ति जगाकर,
दे ज्ञान मानव को दुख से बचाया।।

RAM KUMAR KUSHWAHA

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