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Tuesday, December 6, 2022
डेली न्यूज़

16 महीनों में नहीं बना बंदूक का एक भी लायसेंस

Sporting guns are displayed at Wyss Waffen gun shop in the town of Burgdorf, Switzerland August 10, 2016. Picture taken August 10, 2016. REUTERS/Arnd Wiegmann
Visfot News

छतरपुर। बंदूक प्रेम के लिए प्रख्यात और अपराधों के लिए कुख्यात बुन्देलखण्ड के छतरपुर जिले में पिछले डेढ़ साल से एक नया बदलाव आया है। अब यहां बंदूक के प्रति लगाव कम हो रहा है जबकि विकास, रोजगार के प्रति चाहत बढ़ रही है। इस बदलाव के वाहक बने छतरपुर के सख्त मिजाज कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह जिन्होंने पिछले 16 महीने में कलेक्टर कार्यालय से बंदूक का एक भी नया लाइसेंस जारी नहीं किया। एक तरफ उन्होंने शस्त्र रखने की कुरीति पर अंकुश लगाने का काम किया तो वहीं दूसरी तरफ निर्माण और रोजगार के क्षेत्र में पिछड़े छतरपुर जिले में विकास के नए काम शुरू किए हैं। इस बदलाव से न सिर्फ छतरपुर जिले में एक नई सुबह की शुरूआत हुई है तो वहीं दूसरी तरफ बंदूक से होने वाले आपराधिक मामलों में गिरावट भी आयी है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह के 16 माह के कार्यकाल में सिर्फ आधा दर्जन फौती लाइसेंस को छोडक़र नए लाइसेंस जारी नहीं किए गए हैं। जिला प्रशासन के द्वारा पिछले 16 महीने में छतरपुर जिले के लोगों को कलेक्टर कार्यालय से जारी होने वाले शस्त्रों के लाइसेंस नहीं दिए जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है छतरपुर में पहले से ही मौजूद लगभग 13 हजार शस्त्र लाइसेंस। 20 लाख की आबादी वाले छतरपुर जिले में जहां पेयजल संकट, सिंचाई संकट, गरीबी और बेरोजगारी की समस्या वर्षों से चली आ रही है वहां भी बंदूक के प्रति चाहत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों ने 13 हजार शस्त्र लाइसेंस बनवा रखे हैं। जिले में मौजूद इन शस्त्र धारकों ने आत्मरक्षा के नाम पर ये लाइसेंस बनवाए हैं लेकिन इन शस्त्रों का दुरूपयोग कर बार देखा गया है। हर्ष फायरिंग के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं में कई लोगों की जानें जा चुकी हैं इतना ही नहीं अवैध रूप से मौजूद हथियारों के पास भी गोलियां इन्हीं शस्त्र लाइसेंसों के धारकों अथवा इन लाइसेंसों के नाम पर दुकानों से उपलब्ध होती हैं। कुल मिलाकर बंदूक से होने वाले अपराधों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इन्हीं वैधानिक शस्त्रों की भूमिका रहती है।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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