Please assign a menu to the primary menu location under menu

Tuesday, December 6, 2022
धर्म कर्म

इन पशु पक्षियों के शकुन तो कार्यों की सफलता सूचक होते हैं

इन पशु पक्षियों के शकुन तो कार्यों की सफलता सूचक होते हैं

घूस लेकर काम करना, ये कोई ईमानदारी नहीं हैघूस लेकर काम करना, ये कोई ईमानदारी नहीं है
Visfot News

आचार्य ब्रजपाल शुक्ल, वृंदावन धाम
रामचरित मानस के अयोध्या काण्ड के 303 वें दोहे की 1,2,3,4,5 वीं ,और छठवीं चौपाई में तुलसीदास जी ने कार्य के सफलता सूचक शकुन बताते हुए कहा कि जब श्री राम जी की बारात अयोध्या से जनकपुरी की ओर चलने लगी तो अयोध्या के बाहर ये शकुन होने लगे –
बनइ न बरनत बनी बराता।
होहिं सगुन सुन्दर सुभदाता।। 1।।
श्री राम जी की बारात का भला क्या वर्णन करें? जिस बारात में त्रिकालदर्शी गुरु वसिष्ठ जी पधार रहे हों, तथा जिस बारात में महाराज दशरथ जी जैसे पुण्यात्मा हों, वह बारात तो साक्षात् पुण्य, ज्ञान,भक्ति तथा स्नेह आदि सद्गुणों की बारात है। उसका क्या वर्णन हो सकता है? अवर्णनीय है।
होहिं सगुन सुन्दर सुभदाता
सुन्दरता अर्थात शोभा और शुभ फलों को देनेवाले शकुन होने लगे।
अब शुभ फल देनेवाले शकुनों को देखिए –
दाहिन काग सुखेत सुहावा।
नकुल दरस सब काहू पावा।।
अयोध्यापुरी से बारात बाहर आई तो सभी बारातियों ने देखा कि दाहिनी ओर खेत में निश्चिंत भाव से काग अर्थात कौआ बैठे बैठे सभी बारातियों की ओर मुख करके देख रहा है।
नकुल दरस सब काहूं पावा।
नेवला भी बारातियोंं की दाहिनी ओर इस प्रकार से विचरण कर रहा था कि सभी बारातियों को नेवले का बार बार दर्शन हो रहा था। सभी बाराती, दाहिनी ओर कौआ और नेवले के दर्शन करके श्री राम जी के विवाह की निर्विघ्नता सूचक शकुनों से प्रसन्न हो रहे थे। जो बाराती बातों में लगे होते थे तो देखनेवाले लोग उनको टोककर उन शकुनों को दिखा देते थे। कौआ और नेवले के दर्शन के बाद आगे दूसरे शकुन भी होते जा रहे थे।
सानुकूल बह त्रिविध बयारी।
सघट सबाल आव बर नारी।।
बारातियों ने देखा कि अचानक ही ठंडी ठंडी अनुकूल हवा बहने लगी। हवा में सुगन्धित पुष्पों की सुगन्ध थी।
सघट सबाल आव बर नारी।
एक सुन्दर नारी सघट अर्थात जल से भरा हुआ घड़ा और सबाल अर्थात बालक के सहित सामने से चली आ रही है। जल से भरे हुए घड़ों को लिए हुए, अथवा अपने दुधमुहें बच्चे के साथ कोई नारी सामने से आती हुई मिल जाए तो समझिए कि निश्चित ही कार्य सिद्ध हो जाएगा। यदि आप दुखी हैं तो इन शकुनों को देखकर समझिए कि अब दुखों से अतिशीघ्र मुक्ति मिलनेवाली है।
लोवा फिर फिर दरस दिखावा।
सुरभी सनमुख सिसुहि पिआवा।।
बारातियों को लोवा अर्थात गौरैया चिडिय़ा बार बार चहकती नाचती हुई, धूल में नहाती हुई दिखाई दे रही थी। सबको देख देखकर पंखों को फैला फैलाकर प्रसन्न हो रही थी।
सुरभी सनमुख सिसुहि पिआवा।
सभी बारातियों ने देखा कि गौ माता बछड़े को दूध पिलाती हुई बारातियों की ओर निहार रही है। इन शकुनों को देखकर बारातियों में उमंग उत्साह बढ़ता चला जा रहा था।
मृगमाला फिर दाहिने आई।
मंगल गन जनु दीन्ह दिखाई।।
मृगमाला अर्थात हिरणों का समूह बाईं ओर से दाहिनी ओर बारातियों के आगे से निकलने लगे। हिरणों का समूह हो या एक ही हिरण हो, यदि बाईं ओर से दाहिनी ओर निकल रहे हैं तो कार्य सिद्ध ही होना है। दुख, रोग दूर ही होना है। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होना है।
सनमुख आयउ दधि अरु मीना।
कर पुस्तक दुइ विप्र प्रबीना।।
बारातियों को आज श्री राम जी की बारात में सारे के सारे शकुन एक साथ देखने को मिल रहे थे। शकुनों को एक साथ देखकर आश्चर्य भी हो रहा था। दही और मछली को लिए हुए कोई आते हुए दिखाई दे रहा था। अर्थात कोई स्त्री या पुरुष मछली या दही लाते हुए सामने दिख जाए तो भी शुभ शकुन है। मात्र मछली लिए हो या मात्र दही लिए हो, अथवा दोनों एक साथ हों, सभी प्रकार से शुभ शकुन है।
कर पुस्तक दुइ विप्र प्रबीना।
दो विद्वान ब्राह्मण हाथ में पुस्तक लिए हुए सामने से चले आ रहे हैं। उनको देखकर सभी ने ब्राह्मणों को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और ब्राह्मणों ने सुभाशीष दिया। इस प्रकार के विविध प्रकार के शकुन श्री राम जी की बारात में एक साथ सबको देखने को मिल रहे थे। सभी की शुभकामनाएं तथा प्रसन्नता, बारातियों के मुखमण्डल में दिखाई दे रही थीं। शकुन अपशकुन में एक बात बहुत ध्यान देने योग्य है कि शकुन बनाए नहीं जाते हैं और अपशकुन बनाए या हटाए नहीं जाते हैं। ऐसा नहीं किया जाता है कि किसी को भेज दिया कि जब हम घर से निकलें तो तुम घड़े में पानी भरकर हमारे सामने आ जाना, या बच्चे को लेकर आ जाना। ये सब बनाए हुए शकुन हैं। ये शकुन नहीं हैं। ऐसा भी नहीं कर सकते हैं कि ईष्र्या के कारण किसी के सामने खाली घड़ा आदि लेकर किसी अपशकुन बनाओ। शकुन और अपशकुन अपने आप ही प्राकृतिक रूप से होना चाहिए। पूर्वजन्मों के किन्हीं पुण्यों के कारण दुष्ट स्त्री पुरुषों को भी शकुन होते हैं तथा पूर्वजन्मों के किसी दोष के कारण सज्जन धर्मात्मा स्त्री पुरुषों को भी अपशकुन होते हैं। शकुन अपशकुन को ध्यान में रखते हुए भगवान की कृपा समझना चाहिए कि पशु पक्षियों आदि के द्वारा हमको भगवान प्रेरणा देते हैं। कार्य की सिद्धि असिद्धि की सूचना देते हैं। दुख दूर होने के शुभ संकेत देकर धैर्य धारण करने का मनोबल बढ़ाते हैं। शकुन अपशकुन जानना बहुत आवश्यक है। यदि इनका ज्ञान है तो तत्काल ही भविष्य में होनेवाले सुखदुख का ज्ञान हो जाता है। ये विद्या लक्षण जाननेवाले स्त्री पुरुषों को बहुत जल्दी कोई ठग नहीं सकता है।

RAM KUMAR KUSHWAHA
भाषा चुने »