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Tuesday, December 6, 2022
धर्म कर्म

प्रत्येक स्त्री पुरुष को अपनी ये 9 चीजें गुप्त रखना चाहिए

Visfot News

आचार्य ब्रजपाल शुक्ल, वृंदावन धाम
पंचतन्त्र के मित्रलाभ प्रकरण के 131 वें श्लोक में विष्णुशर्मा जी ने सभी स्त्री पुरुषों को सुखी रहने की नीति बताते हुए ये 9 चीजें गुप्त रखने के लिए कहा कि –
आयुर्वित्तं गृहच्छिद्रं मन्त्रमैथुनभेषजम्।
तपो दानापमानं च नव गोप्यानि यत्नत:।। 131।।
सभी स्त्री पुरुषों को ये अपनी 9 चीजें आजीवन छिपाना चाहिए।
(1) आयु
(2) वित्त अर्थात धन
(3) गृहच्छिद्र अर्थात अपने परिवार की कमी
(4) मन्त्र अर्थात अपना निर्णय या आपसी मन्त्रणा,विचार विमर्श।
(5) मैथुन अर्थात पति पत्नी का परस्पर संयोग।
(6) भेषज अर्थात औषधि
(7) तप
(8) दान
(9) अपमान।
अब प्रत्येक गुण के छिपाने के लाभ और बताने से हानि पर थोड़ा विचार कर लीजिए –
(1) आयु
किसी को अपनी आयु नहीं बताना चाहिए। क्योंकि कि यदि आप बार बार सबको आयु बताते रहेंगे तो आपके मन में एक ऐसा भाव जगने लगेगा कि अब इतनी आयु बची है, अब इतनी आयु बची है, अब तो मैं बूढ़ा हो गया हूं। अब तो मेरे मरने के दिन आनेवाले हैं, इत्यादि अनेक प्रकार के विपरीत भाव जागृत होने लगेंगे। ऐसे भावों से मानसिक दुर्बलता आती है। उत्साह कम होता है। आयु को न बताने से मन के बल से शारीरिक क्षमता बनी रहती है। धर्म, सत्कर्म, तीर्थयात्रा, परोपकार आदि करते हुए घर परिवार के कार्य करने की हिम्मत बनी रहती है। आयु बताने पर सामनेवाले भी कहने लगते हैं कि अरे! आपकी तो बहुत आयु हो रही है। अब ऐसा न करना, वहां न जाना, ऐसा न बोलना आदि मनोबल को गिरानेवालीं बातें करने करने लगते हैं। इसलिए आयु नहीं बताना चाहिए।
(2) वित्तम् (धन)
जब आप सभी से अपनी आय के बारे में बताते हैं, या बार ऋण होने की चर्चा करते हैं तो जिसको बताते हैं, वे लोग ही सबसे कहने लगते हैं कि वह तो ऋण में डूबा हुआ है। उसके पास तो कुछ भी देने के लिए नहीं है। जिसको बताएंगे वही आपसे दूर दूर रहने लगता है। तथा उसने भी जिन जिन को बताया होगा, वे भी आपकी उपेक्षा करने लगते हैं। समर आने पर आपको मांगने पर भी कोई पैसों की सहायता नहीं करते हैं। क्योंकि सभी जान जाते हैं कि इसके पास कुछ भी नहीं है तो कहां से देगा? इसलिए अपने धन के विषय में,आय के विषय में नहीं बताना चाहिए। जब आप किसी को अपनी आय और धन नहीं बताते हैं तो सभी लोग आपको सुखी और समृद्ध समझकर आपसे मित्रता करके आपको अपना अच्छा सहयोगी सहायक समझकर अच्छा व्यवहार करते हैं और आदर सम्मान भी करते हैं। सारा संसार अज्ञानी है। कोई किसी के मनोभाव को नहीं जानता है तो अपनी कमजोरी अपने मुख से नहीं बताना चाहिए।
(3) गृहच्छिद्रम् (घर का भेद)
सभी के घरवालों में कोई न कोई तो कमी रहती ही है। दुर्गुण भी कोई न कोई रहता ही है। जो दुर्गुण सार्वजनिक हो जाते हैं तो लोग कहने लगते हैं, अरे भाई! उसकी बात का विश्वास नहीं करना चाहिए, वो शराबी, कबाबी, कबाड़ी आदमी है, दिनभर झूठ बोलता है।
पति पत्नी, भाई, माता पिता,पुत्र पुत्री आदि जब अपने परिवार की बुरी आदतों को सबको बताने लगते हैं तो सभी रिश्तेदार तथा मित्र आदि सभी लोग दूर दूर भागते हैं। पारिवारिक सम्मान भी समाप्त हो जाता है। आपके प्रति जो समाज में ऐसा भाव रहता है कि ये बहुत अच्छे लोग हैं, वह भाव ही समाप्त हो जाता है। पूरे परिवार को लोग कुदृष्टि से देखने लगते हैं।
(4) मन्त्रम अर्थात मन्त्रणा
आपस में परिवार में पति पत्नी में जो विचार विमर्श होता है, वह कार्य दूसरों को बताने से बदल जाता है। कुछ लोग उस कार्य के लाभ कम और हानि अधिक बताने लगते हैं। व्यर्थ की सलाह देने लगते हैं। तो कार्य प्रारम्भ होने से पहले ही कार्य करने की इच्छा समाप्त हो जाती है। इसलिए अपने घर परिवार की उन्नति के लिए जो निर्णय बताया किया जाए, वह किसी को बताना नहीं चाहिए। कार्य सुकर सुखदायक हो तो प्रारम्भ करना चाहिए।
इसी प्रकार 5 वें मैथुन और छठवें औषधि की भी चर्चा नहीं करना चाहिए।
7 वें अपने जप तप की तथा 8 वें दान की भी चर्चा बार बार किसी से नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनकी चर्चा करने से लोग धार्मिक तो मानते नहीं हैं और ऊपर से अहंकारी और पाखण्डी समझने लगते हैं।
9 वें अपमान को भी किसी से नहीं बताना चाहिए। क्योंकि यदि किसी को पता नहीं है कि किसने आपका कब और कहां अपमान किया है तो आपको सभी अच्छा और बलवान समझते रहेंगे। अन्यथा कमजोर समझकर दूसरे लोग भी अपमानित करते रहेंगे। इसलिए अपमान आदि की चर्चा नहीं करना चाहिए।
संसार एक समुद्र है, इसमें आपसे बड़ी मछलियां भी रहतीं हैं। घर के लोग, रिश्तेदार, पड़ोस, मुहल्ला, मित्र, दुकानदार आदि सभी तो आपको खाने के लिए ही बैठे हैं ।बहुत भयानक है। सम्हलकर चलिए और सम्हलकर रहिए। नहीं तो जीना मुश्किल हो जाएगा।

RAM KUMAR KUSHWAHA
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